लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कानपुर के प्रसिद्ध बुद्धा पार्क में शिवालय पार्क बनाने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। यह प्रस्ताव पिछले दिनों काफी विवादों में रहा था और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की थी। सरकार द्वारा प्रस्ताव को रद्द करने के फैसले का मायावती ने स्वागत किया और इसे समाज में शांति और भाईचारे की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र स्थित बुद्धा पार्क बौद्ध धर्म और डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुयायियों का आस्था स्थल माना जाता है। यहां पर अम्बेडकर की विचारधारा और बौद्ध धरोहर से जुड़े कार्यक्रम लगातार होते रहते हैं। हाल ही में खबर आई थी कि राज्य सरकार ने बुद्धा पार्क के भीतर शिवालय पार्क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के सामने आते ही बौद्ध अनुयायियों और दलित संगठनों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने इस कदम को बौद्ध समुदाय की भावनाओं के खिलाफ बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
मायावती का विरोध और चेतावनी
बसपा सुप्रीमो मायावती ने 31 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार को इस प्रस्ताव के खिलाफ चेतावनी दी थी। उन्होंने लिखा था कि, “भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष है। ऐसे में किसी एक धर्म के पूजास्थल के भीतर दूसरे धर्म का स्थल बनाना किसी भी हाल में उचित नहीं है। बुद्धा पार्क बौद्ध धर्म और अम्बेडकर अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यदि यहां किसी और धर्म का पूजा स्थल बनाया गया तो यह कदम समाज में अशांति और घृणा को जन्म देगा।”
मायावती ने सरकार से अपील की थी कि तुरंत इस प्रस्ताव को रद्द किया जाए, वरना इसका गंभीर असर सामाजिक शांति और भाईचारे पर पड़ सकता है।
प्रस्ताव रद्द होने के बाद प्रतिक्रिया
योगी सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रस्ताव को रद्द करने का फैसला लिया। सरकार का कहना है कि किसी भी विवादित कदम से समाज में तनाव फैलने की संभावना बढ़ जाती है और प्रशासन इस तरह की स्थिति नहीं चाहता। इस फैसले के बाद मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा – “कानपुर के प्रसिद्ध बुद्धा पार्क में शिवालय पार्क बनाने का अति-विवादित प्रस्ताव रद्द किए जाने की खबर स्वागत योग्य है। यूपी सरकार को इसके लिए धन्यवाद। उम्मीद है कि सरकार आगे भी ऐसे किसी विवादित कदम को रोकने के लिए गंभीरता और सख्ती से काम करेगी ताकि समाज में शांति, भाईचारा और सौहार्द बना रहे।”
चंद्रशेखर आज़ाद का भी विरोध
बसपा के साथ-साथ भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने भी इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया था। उनका कहना था कि यह कदम बौद्ध समाज और अम्बेडकर अनुयायियों के खिलाफ षड्यंत्र है। उन्होंने चेताया था कि अगर सरकार ने इस प्रस्ताव को वापस नहीं लिया तो वह आंदोलन करेंगे।
राजनीतिक माहौल पर असर
इस पूरे विवाद ने यूपी की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। दलित संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर धार्मिक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है। वहीं, सरकार ने अपने बचाव में कहा कि प्रस्ताव केवल एक प्रारंभिक स्तर पर था और अब इसे रद्द कर दिया गया है।
सामाजिक सौहार्द पर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि योगी सरकार का यह कदम समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में अहम है। बुद्धा पार्क जैसे स्थलों का महत्व न केवल आस्था से जुड़ा है बल्कि यह सामाजिक समानता और भाईचारे का प्रतीक भी हैं। ऐसे में वहां किसी भी अन्य धार्मिक स्थल का निर्माण विवाद को जन्म दे सकता था।
कानपुर बुद्धा पार्क में शिवालय पार्क बनाने के प्रस्ताव का विरोध व्यापक स्तर पर हुआ। मायावती और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे नेताओं ने इसे तुरंत रोकने की मांग की। अंततः सरकार ने प्रस्ताव रद्द कर दिया और तनाव की स्थिति को खत्म किया। यह फैसला समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।