इसरो और नासा के संयुक्त मिशन निसार ने अंतरिक्ष में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है, क्योंकि इस सैटेलाइट ने अपना 12 मीटर व्यास वाला विशाल एंटीना सफलतापूर्वक खोल दिया है। यह एंटीना निसार मिशन का सबसे अहम हिस्सा है और इसी की मदद से पृथ्वी की सतह, जंगलों, ग्लेशियरों और समुद्र तटीय इलाकों में होने वाले बेहद छोटे बदलावों को भी आसानी से पहचाना जा सकेगा। निसार दुनिया का पहला ऐसा सैटेलाइट है जो दो तरह की रडार तरंगों—L-बैंड और S-बैंड—का एक साथ उपयोग करता है, जिससे यह बाकी सैटेलाइटों की तुलना में ज्यादा सटीक और विस्तृत जानकारी देगा। एंटीना का खुलना इसलिए भी खास है क्योंकि इसे धरती से लॉन्च करते समय पूरी तरह फोल्ड किया गया था और अंतरिक्ष में इसे एक जटिल प्रक्रिया के तहत सावधानी से तैनात किया गया है। अब इसके सक्रिय हो जाने के बाद निसार हर 12 दिन में पूरी पृथ्वी का स्कैन कर सकेगा और भूकंप से पहले होने वाली जमीन की हलचल, ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार, जंगलों में पेड़ों की स्थिति, तटीय इलाकों में कटाव, समुद्र स्तर में वृद्धि, खेती और पानी से जुड़े बदलाव जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ लगातार भेजता रहेगा। यह मिशन जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा, क्योंकि इससे मिलने वाला डेटा वैज्ञानिकों और सरकारों को पहले से चेतावनी देगा और बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा। निसार मिशन भारत और अमेरिका की साझेदारी का एक मजबूत उदाहरण है, क्योंकि इसरो ने S-बैंड रडार और लॉन्च की जिम्मेदारी संभाली है, जबकि नासा ने L-बैंड रडार और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरण तैयार किए हैं। आने वाले कुछ महीनों में सैटेलाइट पूरी तरह ऑपरेशन मोड में आ जाएगा और लगातार पृथ्वी की सटीक जानकारी भेजना शुरू करेगा। उम्मीद है कि निसार अगले 10 वर्षों तक धरती की निगरानी करता रहेगा और जलवायु परिवर्तन की समझ को नए स्तर पर ले जाएगा।