मध्य पूर्व में जारी जंग के बीच ईरान ने अमेरिका पर तीखा प्रहार किया है। तेहरान से जारी बयान में ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने स्पष्ट कहा कि पिछले 24 दिनों से अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने अमेरिकी कूटनीति को अविश्वसनीय बताते हुए आरोप लगाया कि वाशिंगटन मध्यस्थता प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहा है और पूरे क्षेत्र में युद्ध फैलाने की साजिश रच रहा है। बघाई ने इसे ‘अवैध युद्ध’ करार दिया, जिसमें ईरान को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था, “ईरान ने यह जंग शुरू नहीं की, लेकिन आत्मरक्षा का हक सबको है। अंतरराष्ट्रीय कानून यही कहता है।”
ईरान ने साफ लहजे में अमेरिका को दोषी ठहराया, लेकिन पड़ोसी देशों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया। पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान के उसके साथ मजबूत संबंध हैं और इस्लामाबाद की मंशा सकारात्मक है। पड़ोसी राष्ट्र तनाव कम करने में जुटे हैं। इसी क्रम में भारत का जिक्र आया प्रवक्ता ने कहा, “भारत के साथ हमारे ऐतिहासिक और सम्मानजनक रिश्ते हैं। वह उन देशों में शामिल नहीं जो हमलावरों का साथ दे रहे।” होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक आवाजाही पर भारत के साथ बातचीत जारी है। ईरान ने यूरोपीय देशों के साथ भी संपर्क बनाए रखने की बात कही।
इधर, मंगलवार को ईरान ने इसराइल और खाड़ी के अरब देशों पर मिसाइल हमले तेज कर दिए। एक मिसाइल तेल अवीव की सड़क पर गिरी, जिससे हड़कंप मच गया। यह बयान ऐसे समय आया जब क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान भारत जैसे दोस्तों पर भरोसा कर रहा है, जो ऊर्जा और व्यापार में महत्वपूर्ण साझेदार है। भारत ने अब तक तटस्थ रुख अपनाया है, लेकिन होर्मुज जलमार्ग से तेल आयात पर नजर रखी हुई है।
यह बयान वैश्विक कूटनीति में नया मोड़ ला सकता है। ईरान अमेरिका को निशाना बनाते हुए एशियाई दोस्तों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। क्या भारत इस तनाव में मध्यस्थ बनेगा? स्थिति गंभीर है, दुनिया देख रही है।