अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद तेहरान ने नया अंतरिम नेतृत्व चुना। वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को लीडरशिप काउंसिल का न्यायविद सदस्य बनाया गया। वे सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारियाँ अस्थायी रूप से निभाएँगे।
67 वर्षीय अराफी का जन्म 1959 में यज़्द प्रांत के मायबोद में हुआ। वे खामेनेई के करीबी रहे। वर्तमान में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं। यह 88 सदस्यीय निकाय सुप्रीम लीडर चुनता है।
प्रमुख भूमिकाएँ
अराफी ईरान की राष्ट्रीय मदरसा प्रणाली के प्रमुख हैं। वे इस्लामी सेमिनरी व्यवस्था का नेतृत्व करते हैं। 2019 में गार्डियन काउंसिल के सदस्य रहे, जो चुनाव उम्मीदवारों की जाँच और कानूनों की समीक्षा करता है। उन्होंने अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का भी नेतृत्व किया, जो विदेशी धर्मगुरुओं को प्रशिक्षित करती है।
उनके पिता मोहम्मद इब्राहिम अल-अराफी 1979 की इस्लामी क्रांति में अयातुल्ला खुमैनी के सहयोगी थे। अराफी धार्मिक रूप से स्थापित हैं। वे सुप्रीम लीडर के उत्तराधिकार दौड़ में प्रमुख थे।
अंतरिम व्यवस्था
ईरान के संविधान के अनुसार, खामेनेई की मौत पर तीन सदस्यीय काउंसिल बनती है। इसमें राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन, चीफ जस्टिस मोहसेनी एजेई और एक धर्मविद (अराफी) शामिल। यह काउंसिल तब तक सुप्रीम लीडर की भूमिका निभाएगी, जब तक असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नया स्थायी लीडर न चुने।
परिषद सेना, न्यायपालिका और राजनीतिक फैसलों पर नियंत्रण रखेगी। यह संक्रमणकालीन अवधि ईरान की स्थिरता बनाए रखेगी।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
खामेनेई की मौत अमेरिका-इजरायल के हमलों में हुई, जिसमें उनके चार रिश्तेदार भी मारे गए। ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर बमबारी जारी रखने की चेतावनी दी।
अराफी का चयन ईरान की क्रांति के बाद दूसरा बड़ा नेतृत्व परिवर्तन है। वे कट्टरपंथी नीतियों को जारी रख सकते हैं, लेकिन संक्रमण चुनौतीपूर्ण होगा। मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ा है।