ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई बोले- जंग शुरू : यहूदी शासन पर कोई दया नहीं, ईरान में मौत का आंकड़ा 600 के करीब पहुंचा

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हो गई थीं, जिससे हजारों इजराइली विदेशों में फंसे रह गए थे

Vin News Network
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ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई बोले- जंग शुरू : यहूदी शासन पर कोई दया नहीं, ईरान में मौत का आंकड़ा 600 के करीब पहुंचा

तेहरान/तेल अवीव : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने मंगलवार देर रात X पर लिखा- जंग शुरू होती है। हम आतंकी यहूदी शासन को कड़ा जवाब देंगे। उन पर कोई दया नहीं दिखाएंगे। इस ऐलान के बाद ईरान ने इजराइल पर 25 मिसाइलें दागी हैं।

ईरान-इजराइल के बीच पिछले 5 दिनों से हिंसक संघर्ष जारी था, अब खामेनेई की पोस्ट को जंग का अधिकारिक ऐलान माना जा रहा है। यानी अब इसे संघर्ष की बजाय जंग कहा जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द अमेरिका भी इसमें शामिल हो सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने के बाद व्हाइट हाउस में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक की। इसके बाद अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और ज्यादा फाइटर जेट्स भेजने का फैसला किया।

ईरान-इजराइल के बीच लड़ाई में अब तक 224 ईरानी मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 घायल हुए हैं। वहीं, इजराइल में अब तक 24 की मौत हुई है, जबकि 600 से ज्यादा घायल हैं।

इजराइली सेना ने कहा है कि ईरान में रातभर चले एक बड़े ऑपरेशन में 50 से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। इस हमले में कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें परमाणु हथियारों से जुड़ी एक फैक्ट्री और हथियार बनाने वाली कई जगहें शामिल थीं।

सेना के मुताबिक, तेहरान में जिस सेंट्रीफ्यूज प्रोडक्शन साइट पर हमला हुआ, वह यूरेनियम को शुद्ध करने के लिए इस्तेमाल होता था। इसे ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के लिए इस्तेमाल कर सकता था।

इसके अलावा, सेना ने बताया कि जिन हथियार फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया, वहां मिसाइलों और विमानों को गिराने वाले सिस्टम बनाए जा रहे थे। इन जगहों पर कच्चे माल और जरूरी उपकरण तैयार किए जा रहे थे।

इजराइल की सेना ने इस ऑपरेशन में शामिल लड़ाकू विमानों की उड़ान की फुटेज भी जारी की है। इजराइल ने बुधवार सुबह भी ईरान की राजधानी तेहरान पर हमले किए। मेहर समाचार एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें तेहरान के आसमान में विस्फोट होते दिख रहे हैं। इसमें दावा किया गया है कि ईरान की एयर डिफेंस फोर्स ने इजराइल की ओर से दागी गई मिसाइलों को मार गिराया।

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हो गई थीं, जिससे हजारों इजराइली विदेशों में फंसे रह गए थे। अब पहली उड़ान जो इन फंसे हुए नागरिकों को वापस लाने के लिए भेजी गई थी, वह तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गई है। यह विमान साइप्रस के लारनाका शहर से इजराइली नागरिकों को लेकर आई।

इजराइल ने जब पिछले सप्ताह ईरान पर हमला किया तो रूस ने इसकी आलोचना की और इसे खतरनाक बताया। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इजराइल-ईरान संघर्ष से रूस को फायदा हो सकता है।

इजराइल-ईरान के बीच लड़ाई और तेज होती है तो तेल की कीमतों में इजाफा होगा जिससे रूस को ज्यादा आमदनी होगी। इसके अलावा दुनिया का ध्यान यूक्रेन युद्ध से हटेगा, जो रूस के लिए फायदेमंद है। एक रूसी अखबार ने इजराइल-ईरान संघर्ष पर लिखा है, “कीव को भुला दिया गया है।”

हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस जंग से रूस को नुकसान भी है। अगर यह युद्ध लंबा चलता है या ईरान में सरकार बदलती है, तो रूस अपना एक और अहम सहयोगी खो सकता है, जैसे उसने पहले सीरिया के असद को खो दिया था। ऐसे में रूस की अंतरराष्ट्रीय छवि कमजोर पड़ सकती है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक टास्क फोर्स बना रहा है। अमेरिका ने एक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है, जिसमें किसी भी अमेरिकी को ईरान की यात्रा नहीं करने को कहा गया है।

इसके अलावा, इजराइल और इराक की यात्रा में भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यह टास्क फोर्स स्थिति बिगड़ने पर अमेरिकी राजनयिक कर्मचारियों और पश्चिम एशिया क्षेत्र के आम नागरिकों को सुरक्षित निकालने की रणनीति पर काम करेगी।

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश नीति का कंट्रोल पूरी तरह व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रम्प के हाथ में है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से अपील की है कि वह इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को रोकने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि हालात बहुत गंभीर होते जा रहे हैं, और अगर समय रहते कुछ नहीं किया गया, तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस टकराव को बातचीत और कूटनीति से ही रोका जा सकता है, ताकि और नुकसान न हो।

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति महमूद पजशकियान और UAE लीडर शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच मंगलवार रात बातचीत हुई। UAE के राष्ट्रपति ने कहा कि इस मुश्किल समय में वे ईरान और वहां के लोगों के साथ खड़े हैं।

नाहयान ने यह भी कहा कि UAE पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति व स्थिरता वापस लाने की कोशिशों का समर्थन करता है। इसके लिए वे सभी पक्षों से लगातार बातचीत कर रहे हैं।

ईरान में इजराइली हमलों में मारे जाने वाले लोगों की संख्या अब 585 हो चुकी है। वहीं, 1,326 लोग घायल हुए हैं। यह दावा वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ग्रुप ने बुधवार को किया। ग्रुप ने बताया कि मरने वालों में से 239 आम नागरिक थे, जबकि 126 सिक्योरिटी फोर्स के मेंबर थे।

वहीं, दूसरी ओर, ईरान की सरकार ने अब तक मौतों की पूरी जानकारी साझा नहीं की है। आखिरी बार ईरान ने सोमवार को हताहतों की जानकारी शेयर की थी। इसके मुताबिक ईरान में मरने वालों की संख्या 224 और और घायलों की संख्या 1,277 है। अमेरिका में यूगॉव के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि ज्यादातर अमेरिकी नागरिक नहीं चाहते कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जंग में शामिल हो। करीब 60 फीसदी लोगों ने कहा कि अमेरिका को इससे दूर रहना चाहिए। सिर्फ 16 फीसदी लोगों ने अमेरिका के शामिल होने पर सहमति जताई। अमेरिका को जंग में भाग लेना चाहिए या नहीं, 24% लोग यह तय नहीं कर पाए।

राजनीतिक रुख के आधार पर देखें तो डेमोक्रेट्स में से 65 फीसदी ने अमेरिका के जंग में शामिल होने का विरोध किया। रिपब्लिकन में 53 फीसदी ने विरोध किया। वहीं, 61 फीसदी स्वतंत्र मतदाताओं ने भी यही रुख अपनाया। सर्वे में यह भी सामने आया कि आधे अमेरिकी, ईरान को अमेरिका का दुश्मन मानते हैं, जबकि 25 फीसदी लोगों ने कहा कि ईरान मित्र देश नहीं है।

वॉट्सऐप ने ईरानी सरकार की एक चेतावनी पर चिंता जताई है। दरअसल, ईरान सरकार ने मंगलवार को अपने लोगों से वॉट्सऐप, टेलीग्राम और ऐसे ऐप का इस्तेमाल बंद करने को कहा था जो लोकेशन ट्रैप करते हैं।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRIB ने मंगलवार को रिपोर्ट किया था कि इजराइल इन ऐप्स का इस्तेमाल लोगों की पहचान करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए कर रहा है।

इसके जवाब में वॉट्सऐप के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि उन्हें डर है कि ये झूठे आरोप सरकार द्वारा ऐप को ब्लॉक करने का बहाना बन सकते हैं, खासकर उस समय जब लोगों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

प्रवक्ता ने साफ किया कि वॉट्सऐप यूजर्स की सटीक लोकेशन ट्रैक नहीं करता, और ऐप पर भेजे जाने वाले सभी मैसेज एंड-टु-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं। यानी, उन्हें भेजने और पाने वाले के अलावा कोई और नहीं पढ़ सकता। यहां तक कि वॉट्सऐप भी नहीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंगलवार देर रात व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में इजराइल-ईरान संघर्ष पर एक घंटे 20 मिनट मीटिंग की। इसे लेकर एक अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि ट्रम्प ईरान के फोर्डो न्यूक्लियर सेंटर पर हमला करने पर भी विचार कर रहे हैं।

अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका, ईरान के इस न्यूक्लियर सेंटर पर बंकर-बस्टर बमों से हमला कर सकता है। वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के टैंकर प्लेन इजराइली फाइटर जेट्स को ऑयल सप्लाई भी कर सकते हैं, ताकि वे लंबी दूरी तक हमला कर सकें।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ट्रम्प का मुख्य लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना है।

फिलहाल अमेरिका के चार B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर एयरक्राफ्ट हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया बेस पर तैनात हैं, जो ईरान पर हमले की रेंज में हैं।

ब्रिटेन ने मिडिल ईस्ट में फाइटर जेट्स को तैनात किया है। ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली ने बताया कि साइप्रस और ओमान में मौजूद ब्रिटिश लोगों की सुरक्षा के लिए यह फैसला लिया गया है।

हीली ने कहा कि यहां सैन्य तैनाती का मकसद इलाके में तनाव कम करना और सुरक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी कहा कि इन फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हमारे सहयोगी देशों की मदद के लिए भी किया जा सकता है।

इससे पहले अमेरिका ने भी मिडिल ईस्ट में फाइटर जेट्स की तैनाती बढ़ाने का फैसला किया है। यॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने पहले से ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने की तैयारी कर रखी है। ईरान ने मिसाइलें और हथियार तैयार किए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर अमेरिका के खिलाफ हमला किया जा सके।

अगर अमेरिका इजराइल की ओर से ईरान के साथ जंग में शामिल होता है, तो ईरान इन जगहों पर हमले कर सकता है। हालांकि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग में शामिल होने को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

पेंटागन ने यूरोप में करीब तीन दर्जन ईंधन भरने वाले विमान भेजे हैं। इनका इस्तेमाल या तो अमेरिकी जेट्स को ईंधन देने में होगा ताकि वे अपने ठिकानों की रक्षा कर सकें, या फिर उन बमवर्षक विमानों की मदद के लिए होगा जो ईरान की परमाणु साइट्स जैसे “फोर्डो” पर हमला कर सकते हैं।

अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि अगर अमेरिका जंग में कूदता है, तो ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही लड़ाके रेड सी में जहाजों पर फिर से हमले शुरू कर देंगे। कुछ अधिकारियों का यह भी मानना है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है ताकि अमेरिकी जहाजों को रास्ते में ही रोका जा सके।

इस सबको देखते हुए अमेरिका ने यूएई, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे देशों में अपने सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा है। इस वक्त मध्य पूर्व में अमेरिका के 40,000 से ज्यादा सैनिक मौजूद हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के दो अधिकारियों ने माना है कि अगर अमेरिका इजराइल के साथ जंग में शामिल होता है, तो वे सबसे पहले इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करेंगे। इसके बाद दूसरे अरब देशों में मौजूद अमेरिकी बेस भी उनके निशाने पर होंगे।

इजराइली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने बताया कि 60 इजराइली फाइटर जेट्स ने सेंट्रल ईरान में बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में इजराइली हमलों के कारण ईरानी सेना को पश्चिमी ईरान से हटकर इस्फहान जाना पड़ा, जहां वे अब रॉकेट लॉन्च पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हम अभी भी उनका पीछा कर रहे हैं।

ईरान के हमले के बाद इजराइल ने भी बुधवार को तेहरान पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइली सेना ने तेहरान के निवासियों को चेतावनी दी है कि शहर के डिस्ट्रिक्ट 18 में सैन्य ठिकानों पर जल्द ही हमला किया जा सकता है। इस इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षा के लिए तुरंत यह इलाका छोड़ देना चाहिए।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यरूशलेम में अमेरिकी दूतावास सुरक्षा चिंताओं की वजह से शुक्रवार तक बंद रहेगा। मंत्रालय ने बताया कि यह फैसला इजराइली सेना (IDF) की होम फ्रंट कमांड की सलाह के आधार पर लिया गया है।

यरूशलेम और तेल अवीव में कांसुलर सेवाएं भी बंद रहेंगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल अमेरिकी नागरिकों को इजराइल से निकालने के लिए कोई मदद उपलब्ध नहीं है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने इजराइल पर खीबर शेकन मिसाइलों से हमला किया है। अगर यह दावा सच होता है तो यह पहली बार होगा जब ईरान ने इस मिसाइल का इस्तेमाल किया।

इस मिसाइल को 2022 में पहली बार आम लोगों के सामने पेश किया गया था। यह मिसाइल इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की थर्ड जनरेशन मिसाइल है, जो 1450 किलोमीटर तक टारगेट हिट कर सकती है।

ईरान से जारी संघर्ष के बीच इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रम्प से फोन पर बात की है। ट्रम्प ने कुछ देर पहले ही व्हाइट हाउस में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक की है।

दूसरी तरफ ईरान की राजधानी तेहरान और करज शहर में धमकों की आवाजें सुनी गईं। इजराइली आर्मी ने तेहरान के इंडस्ट्रियल इलाके को खाली करने की चेतावनी जारी की है ।

इजराइली सेना के प्रवक्ता ने कहा- अगले कुछ घंटे में हमारी सेना तेहरान के इस इलाके में उसी तरह हमले करेगी, जैसे बीते कुछ दिनों में ईरान के मिलिट्री ठिकानों पर किए गए थे।

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