तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही ‘अप्रत्यक्ष’ जंग अब मेज पर आ गई है, लेकिन रास्ते अभी भी जुदा हैं। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भेजे गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका का संदेश उन तक पहुँचा तो है, लेकिन उसमें लिखी शर्तें स्वीकार करने लायक नहीं हैं।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि तेहरान उनके प्रस्ताव के अधिकांश बिंदुओं पर सहमत हो गया है और बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। ट्रंप ने जोर देकर कहा, “अगर हम शांति ला सकें तो यह बहुत अच्छा होगा, लेकिन उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Straight of Hormuz) को हर हाल में खोलना होगा।”
पाकिस्तान की ‘मध्यस्थ’ भूमिका और ईरान का इनकार
ईरान ने उन खबरों का भी खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत (Direct Talks) हो रही है। बगाई ने साफ कहा कि हम अमेरिका से सीधे बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि पाकिस्तान और अन्य मित्र राष्ट्रों के माध्यम से केवल संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।
ट्रंप का दावा बनाम तेहरान की हकीकत
ट्रंप का मानना है कि ईरान जंग खत्म करने की शर्तों पर काफी हद तक राजी है, लेकिन ईरान का कहना है कि अमेरिका उन चीजों का जिक्र कर रहा है जो उसकी संप्रभुता के खिलाफ हैं। इस कूटनीतिक रस्साकशी के केंद्र में पाकिस्तान है, जो दोनों महाशक्तियों के बीच एक ‘ब्रिज’ का काम कर रहा है।
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप का ‘आर्ट ऑफ द डील’ ईरान पर काम करेगा या फिर मध्य पूर्व का यह संकट और गहरा जाएगा? फिलहाल, तेहरान के ‘ना’ ने शांति की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है।