रसोई पर महंगाई का ‘डबल अटैक’: कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 195 रुपये का भारी उछाल, सरकार ने बताया क्यों बढ़े दाम

Vin News Network
Vin News Network
4 Min Read
व्यापारियों को लगा झटका! कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 195.50 रुपये का उछाल. दिल्ली में अब 2000 के पार हुई कीमत

नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी और व्यापारियों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. 1 अप्रैल 2026 से सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में 195.50 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी है. इस फैसले के बाद दिल्ली में एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1883 रुपये से बढ़कर 2078.50 रुपये के स्तर पर पहुँच गई है. कीमतों में आए इस अचानक उछाल ने होटल, ढाबा संचालकों और छोटे उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है.

सरकार का रुख: ‘बाजार के हाथों में है कीमतें’
सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि कमर्शियल गैस की कीमतें उनके सीधे नियंत्रण में नहीं होती हैं. सरकार के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटलों और इंडस्ट्री में होता है, और इनके दाम पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार और मांग-आपूर्ति के आधार पर तय होते हैं. हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इनके दाम संशोधित करती हैं.

सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम घरेलू उपभोक्ताओं पर सीमित रहेगा. आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल एलपीजी खपत में कमर्शियल सिलेंडर की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम है. सरकार का प्राथमिक लक्ष्य घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखना है.

क्यों लगी कीमतों में आग? ‘होर्मुज’ का संकट
1 अप्रैल को हुई इस बड़ी बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और युद्ध की स्थितियां जिम्मेदार हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक एलपीजी सप्लाई का लगभग 20-30 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है. पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध ने सप्लाई चेन पर भारी दबाव बनाया है, जिससे कच्चा तेल और गैस दोनों ही महंगे हो गए हैं. 1 मार्च से अब तक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कुल 310 रुपये का इजाफा हो चुका है.

कंपनियों का बढ़ता घाटा और पड़ोसी देशों से तुलना
सरकार ने जानकारी दी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भारी नुकसान उठा रही हैं. मौजूदा समय में हर घरेलू सिलेंडर पर कंपनियों को करीब 380 रुपये का घाटा हो रहा है. अनुमान है कि मई के अंत तक यह कुल नुकसान 40,484 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है. पिछले साल भी लगभग 60,000 करोड़ रुपये के बोझ को सरकार और कंपनियों ने मिलकर उठाया था ताकि आम आदमी की जेब पर सीधा असर न पड़े.

पड़ोसी देशों से तुलना करते हुए सरकार ने कहा कि भारत में कीमतें अभी भी नियंत्रित हैं. पाकिस्तान में सिलेंडर की कीमत करीब 1,046 (भारतीय मुद्रा में अंतर के साथ), श्रीलंका में 1,242 और नेपाल में 1,208 के आसपास बनी हुई है.

महानगरों में नई कीमतें (19 किलो सिलेंडर):
दिल्ली: 2078.50 रुपये

  • कोलकाता: 2208.00 रुपये
  • मुंबई: 2031.00 रुपये
  • चेन्नई: 2246.50 रुपये
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *