भारत का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता
समझौते के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है। 27 जनवरी को भारत ने 27 यूरोपीय देशों के साथ यह एफटीए किया है।” उन्होंने कहा कि यह समझौता निवेश को बढ़ावा देगा, नवाचार साझेदारियों को मजबूत करेगा और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल व्यापारिक करार नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का एक व्यापक खाका है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक ट्रेड एग्रीमेंट नहीं, बल्कि साझा समृद्धि के लिए एक ब्लूप्रिंट है।”
गणतंत्र दिवस और कूटनीतिक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ईयू संबंधों में हालिया तेजी का उल्लेख करते हुए कहा कि एक दिन पहले ही यूरोपीय संघ के नेता पहली बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, “कल एक ऐतिहासिक क्षण था, जब पहली बार यूरोपीय संघ के नेता भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने। आज दो प्रमुख लोकतांत्रिक शक्तियां अपने संबंधों में एक निर्णायक अध्याय जोड़ रही हैं।”
उन्होंने यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत के लिए एक अभूतपूर्व अवसर है। प्रधानमंत्री ने कोस्टा को उनके सादे जीवन और सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए “लिस्बन का गांधी” बताया और वॉन डेर लेयेन को यूरोपीय आयोग की पहली महिला अध्यक्ष बनने पर प्रेरणास्रोत बताया।
व्यापार, निवेश और घरेलू प्रभाव
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत-ईयू द्विपक्षीय व्यापार लगभग 180 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
घरेलू प्रभाव पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “इस एफटीए से किसानों और एमएसएमई को लाभ होगा। विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे, निवेश बढ़ेगा और नई नवाचार साझेदारियां बनेंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं और अधिक मजबूत होंगी।
रक्षा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दे
प्रधानमंत्री ने बताया कि व्यापार समझौते के साथ-साथ रक्षा, सुरक्षा और गतिशीलता से जुड़े व्यापक समझौते भी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा सहयोग भारत-ईयू संबंधों को नई दिशा दे रहा है और आतंकवाद-रोधी, समुद्री सुरक्षा तथा साइबर सुरक्षा में सहयोग और मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यूक्रेन, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी नेताओं के बीच चर्चा हुई। उन्होंने दोहराया कि बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय नियमों के प्रति सम्मान दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता है।
औपचारिक प्रक्रिया और आगे की राह
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता संतुलित और भविष्य उन्मुख है। उन्होंने बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग छह महीने में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे और यह समझौता अगले वर्ष लागू होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “आज का दिन हमेशा याद रखा जाएगा। यह हमारी साझा यात्रा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”