भारत और कनाडा ने उर्वरक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने तथा दीर्घकालिक खाद्य एवं कृषि सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय कनाडाई प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की, जिसमें उर्वरक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी, पोटाश की आपूर्ति और निवेश के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई।
उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक
केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस बैठक में कनाडा के प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हौडसन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने उर्वरक क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने और इसे आर्थिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
जेपी नड्डा ने बैठक के दौरान कहा कि उर्वरक क्षेत्र में भारत और कनाडा की साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
पोटाश की उपलब्धता पर जोर
केंद्रीय उर्वरक मंत्री ने कहा कि भारत में पोटाश की उपलब्धता को सुदृढ़ करना मृदा उर्वरता को पुनर्स्थापित करने और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली के तहत संतुलित पोषक तत्व उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में कनाडा की भूमिका की सराहना की।
जेपी नड्डा ने बताया कि भारत अपनी कुल एमओपी उर्वरक आवश्यकताओं का लगभग 25 प्रतिशत कनाडा से आयात करता है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंधों को दर्शाता है।
भारतीय निवेश का उल्लेख
बैठक के दौरान नड्डा ने गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (GSFC) द्वारा कनाडा की पोटाश विकास कंपनी कार्नालाइट रिसोर्सेज इंक में किए गए निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि GSFC ने इस परियोजना में 49.68 मिलियन कनाडाई डॉलर का निवेश किया है।
वर्तमान में, GSFC की इस परियोजना में 47.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो भारत को एक महत्वपूर्ण पोटाश संपत्ति परियोजना में रणनीतिक भागीदारी प्रदान करती है। मंत्री ने कहा कि इस तरह के निवेश भारत की दीर्घकालिक उर्वरक सुरक्षा रणनीति को मजबूत करते हैं।
कनाडा की प्रतिबद्धता
कनाडा के प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हौडसन ने बैठक में भारत की कृषि उत्पादकता के समर्थन के प्रति कनाडा की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि पोटाश एक ऐसा खनिज है, जो कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और कनाडा इस क्षेत्र में भारत का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।
हौडसन ने कनाडा में नए निवेश माहौल की जानकारी देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में भारतीय कंपनियों द्वारा किए जाने वाले निवेश को कनाडा सरकार का पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा सरकार भारतीय साझेदारों द्वारा किए गए निवेश के अनुरूप निवेश करने के लिए तैयार है।
दीर्घकालिक रणनीति पर चर्चा
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने पोटाश सुरक्षा के लिए भारत की दीर्घकालिक रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया। इसमें खनन और अन्वेषण के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के अवसरों और एमओपी के लिए कनाडा के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध करने में भारत की रुचि शामिल रही।
उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की साझेदारी से भारत को स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जबकि कनाडा को भारतीय बाजार में दीर्घकालिक भागीदारी का अवसर मिलेगा।
आर्थिक और कृषि सुरक्षा को मिलेगा बल
बैठक में यह भी कहा गया कि उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र की स्थिरता को समर्थन मिलेगा। भारत और कनाडा ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य में भी उर्वरक क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों की पहचान की जाएगी और आपसी संवाद को जारी रखा जाएगा।