लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कल पसमांदा समुदाय के लिए एक सम्मेलन आयोजित किया। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के इंडी गठबंधन को लेकर दिए गए बयान पर राज्यमंत्री-उत्तर प्रदेश सरकार (अल्पसंख्यक कल्याण,मुस्लिम वक्फ एवं हज) दानिश आजाद अंसारी ने कहा, समाजवादी पार्टी को अचानक पसमांदा समुदाय की याद क्यों आ रही है? उन्हें अब पिछड़े मुसलमानों की चिंता क्यों हो रही है? मैं एक सवाल पूछना चाहता हूं कि क्या कोई समाजवादी पार्टी के किसी नेता द्वारा पसमांदा समुदाय के समर्थन में तक जब समाजवादी पार्टी का शासन था तब समाजवादी पार्टी के नेताजी का एक भी बयान पसमांदा समाज के लिए बता दीजिए। कहीं कोई बयान नहीं था।
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा, इंडी गठबंधन एक असफल प्रयोग साबित हुआ है। यह डूबते जहाज की तरह है और एक-एक करके इसके यात्री इसे छोड़ने लगे हैं। हमने पहले दिन से ही कहा था कि यह गठबंधन एक कमजोर ढांचा है जो केवल व्यक्तिगत राजनीतिक हितों पर बना है और इसका टूटना निश्चित है। दानिश आजाद ने कहा कि हमने पहले दिन से ही कहा था कि यह गठबंधन एक कमजोर ढांचा है, जो केवल व्यक्तिगत राजनीतिक हितों पर बना है और इसका टूटना निश्चित है। आज जो हालात बन चुके हैं, वो यही दर्शाते हैं कि अब एक-एक कर सभी दल इससे किनारा करने लगे हैं। जनता ने इस प्रयोग को नकार दिया है।
इंडिया गठबंधन को बनाने का मकसद विपक्ष को एकजुट करना और भाजपा को 2024 में चुनौती देना था। हालांकि, गठबंधन के भीतर शुरू से ही नेतृत्व को लेकर अस्पष्टता, क्षेत्रीय दलों की आपसी खींचतान, और साझा एजेंडे की कमी दिखी। चुनाव परिणामों ने भी यह साबित कर दिया कि इस गठबंधन ने न तो वोट ट्रांसफर में सफलता पाई, न ही समन्वय दिखा सका। दानिश आजाद का यह बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है, जब लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी खेमे में नाराज़गी, मतभेद और आत्मविश्लेषण का दौर चल रहा है। कांग्रेस, सपा, तृणमूल, आप और अन्य दल अलग-अलग सुर में बोलते दिखाई दे रहे हैं।
मंत्री दानिश अंसारी ने सपा मुखिया अखिलेश यादव को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख हमेशा भ्रमित राजनीति करते हैं। गठबंधन का हिस्सा भी बनते हैं और दूरी भी बना लेते हैं। यही रवैया आम जनता और विपक्षी दलों दोनों को असमंजस में डालता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव परिणामों के बाद अखिलेश यादव द्वारा दिया गया बयान इस बात का संकेत है कि उन्हें भी अब इस गठबंधन की स्थिरता पर भरोसा नहीं रहा। यह स्वीकारोक्ति है कि इंडिया गठबंधन भविष्य की राजनीति में एक प्रमुख विकल्प नहीं बन सकता।