अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को बड़ी राहत देते हुए लगभग 1.2 अरब डॉलर की नई ऋण सहायता को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और लगातार चल रहे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आईएमएफ का यह कदम बताता है कि मुश्किल हालात के बावजूद पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
मंगलवार को अखबार डॉन ने बताया कि आईएमएफ के कार्यकारी निदेशक मंडल ने वाशिंगटन में हुई बैठक में इस मंजूरी को अंतिम रूप दिया। यह मदद दो कार्यक्रमों के तहत दी जा रही है विस्तारित निधि सुविधा (EFF) और टिकाऊ स्थिरता सुविधा (RSF)। नई मंजूरी के बाद पाकिस्तान को EFF से 1 अरब डॉलर और RSF से 20 करोड़ डॉलर निकालने की अनुमति मिल गई है।
पाकिस्तान इस समय आईएमएफ के 24वें कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है। पिछले साल हुए समझौते के मुताबिक, आईएमएफ 39 महीनों में लगभग 7 अरब डॉलर की सहायता देने पर सहमत हुआ था। अब मिली नई किस्त उसी बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है और पाकिस्तान की वित्तीय जरूरतों को देखते हुए इसे अहम माना जा रहा है।
आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक और कार्यवाहक प्रमुख निगेल क्लार्क ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए पाकिस्तान को अपनी आर्थिक नीतियों में अनुशासन बनाए रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को भविष्य में मजबूत और टिकाऊ विकास हासिल करने के लिए बड़े सुधारों को तेज करना जरूरी है।
इस्लामाबाद के अधिकारियों ने इस मंजूरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के प्रयासों पर विश्वास का संकेत बताया है। उनका कहना है कि इससे साबित होता है कि देश अपने आर्थिक मैनेजमेंट में सुधार लाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि असली चुनौती इन प्रतिबद्धताओं को जमीन पर उतारने की है।
पिछले महीने आईएमएफ ने पाकिस्तान के कमजोर वित्तीय प्रबंधन पर नाराजगी जताई थी। संस्था ने कहा था कि पाकिस्तान को नकद लेनदेन की निगरानी बेहतर करनी चाहिए और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग चाहे वह राजनीतिक हो या व्यक्तिगत को रोकना चाहिए।