बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद उनके दिल्ली जाने की चर्चाओं ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया है। उनकी “समृद्धि यात्रा” के दौरान कई स्थानों पर समर्थक हाथों में तख्तियां लेकर उनसे बिहार न छोड़ने की अपील करते दिखाई दिए। गुरुवार को यात्रा के समापन के साथ ही ऐसे भावुक दृश्य बार-बार सामने आए, जिनमें लोगों का अपने मुख्यमंत्री के प्रति गहरा लगाव साफ झलक रहा था।
मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा में माहौल सबसे अधिक भावुक दिखाई दिया। यहां कार्यक्रम के दौरान कई समर्थकों ने उनके भाषण के बीच ही आवाज लगाकर कहा कि वे किसी भी हालत में उन्हें दिल्ली नहीं जाने देंगे। एक महिला समर्थक भावुक होकर रो पड़ी और बोली कि अगर मुख्यमंत्री राज्य छोड़कर चले गए तो बिहार की जनता खुद को “अनाथ” महसूस करेगी। उसने आग्रह किया कि वे केवल बिहार की सेवा करते रहें क्योंकि राज्य को अभी भी उनकी जरूरत है।
एक बुजुर्ग ग्रामीण ने भी संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री यहीं रहें और दिल्ली न जाएं। उनके अनुसार, पिछले दो दशकों में राज्य में हुए विकास कार्यों के कारण लोगों का मुख्यमंत्री से गहरा भावनात्मक रिश्ता बन गया है। यही वजह है कि उनके संभावित प्रस्थान की खबरों ने ग्रामीणों में बेचैनी बढ़ा दी है।
दरअसल, Nitish Kumar लगभग 20 वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं। लंबे समय तक नेतृत्व करने के कारण वे राज्य की राजनीति और प्रशासन का प्रमुख चेहरा बन गए हैं। अब राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि वे सक्रिय राज्य राजनीति से हटकर राष्ट्रीय स्तर की भूमिका निभा सकते हैं। इसी संभावना ने उनके समर्थकों में भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।
आरा में उनकी यात्रा के दौरान भी इसी तरह का दृश्य देखने को मिला। यहां एक व्यक्ति दर्शक दीर्घा में तख्ती लेकर खड़ा था, जिस पर लिखा था कि मुख्यमंत्री पद न छोड़ें क्योंकि बिहार को उनकी आवश्यकता है। इस संदेश से प्रभावित होकर मंच पर बैठे मुख्यमंत्री ने अपने सुरक्षाकर्मी को उस व्यक्ति के पास भेजकर तख्ती मंगवाई और उसे ध्यान से देखा। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को और भी भावुक कर दिया।
आरा में ही आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति बार-बार खड़े होकर मुख्यमंत्री से सवाल करता रहा कि वे बिहार छोड़कर दिल्ली क्यों जा रहे हैं। उसने हाथ जोड़कर उनसे अपील की कि वे अपने समर्थकों को छोड़कर न जाएं और कम से कम 2030 तक राज्य का नेतृत्व करते रहें। स्थानीय बोली में की गई इस अपील ने कार्यक्रम के माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री और जनता के बीच यह जुड़ाव अचानक नहीं बना, बल्कि वर्षों के काम और लगातार संपर्क का परिणाम है। कई ग्रामीणों ने कहा कि सड़क, शिक्षा, बिजली और कानून-व्यवस्था में हुए सुधारों ने लोगों का विश्वास मजबूत किया है। इसी वजह से लोग उन्हें केवल एक नेता नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह देखते हैं।
राज्यसभा चुनाव के बाद Nitish Kumar के संभावित दिल्ली प्रस्थान की खबरों ने बिहार के ग्रामीण इलाकों में भावनाओं का ज्वार पैदा कर दिया है। समृद्धि यात्रा के दौरान सामने आए दृश्य इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री का जनता से गहरा भावनात्मक संबंध है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वे राज्य की राजनीति में बने रहते हैं या राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका निभाने के लिए दिल्ली का रुख करते हैं।