भारत का पूंजी बाजार तेजी से वैश्विक मानकों का नया पैमाना बनता जा रहा है। SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने हाल ही में एक प्रमुख राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने निवेशक सुरक्षा, बाज़ार पारदर्शिता और तकनीक आधारित नियमन के क्षेत्र में कई ऐसे कदम उठाए हैं जो दुनिया के बड़े-बड़े देश अभी तक नहीं उठा पाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत के कई सुधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब चर्चा और अनुसरण का विषय बन रहे हैं।
T+1 और T+0 सेटलमेंट में भारत आगे
वर्ष्णेय ने बताया कि भारत ने T+1 सेटलमेंट यानी एक दिन में ट्रेड निपटान की व्यवस्था अमेरिका से पहले लागू की। जब अमेरिका T+1 की तरफ बढ़ा, तब तक भारत T+0 सेटलमेंट के प्रयोग में जुट चुका था। यह व्यवस्था ट्रेड और उसके अंतिम निपटान के बीच के समय को और कम करेगी, जिससे बाजार में हेराफेरी की संभावना घटेगी और दक्षता बढ़ेगी।
ब्रोकर विफलता के बाद निवेशकों की सुरक्षा
एक पुराने मामले का हवाला देते हुए वर्ष्णेय ने बताया कि एक ब्रोकर ने ग्राहकों की प्रतिभूतियां बैंकों के पास गिरवी रखकर बाद में दिवालियापन घोषित कर दिया था। इससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना से सबक लेते हुए SEBI ने एक तकनीक-आधारित प्लेजिंग और री-प्लेजिंग फ्रेमवर्क लागू किया, जिसमें निवेशक की प्रतिभूतियां उनके खाते में ही रहती हैं चाहे उन्हें गारंटी के रूप में उपयोग क्यों न किया जाए।
इसके अलावा अब फंड और प्रतिभूतियों का लेनदेन सीधे क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और ग्राहक खाते के बीच होता है, ब्रोकर के जरिए नहीं। वर्ष्णेय ने कहा कि यह व्यवस्था दुनिया में कहीं और नहीं है। भारत में क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को हर ग्राहक के स्तर पर पूरी जानकारी होती है, जिससे एक ग्राहक के पैसे दूसरे के काम में इस्तेमाल होने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
निवेश सलाहकारों पर कसेगी नकेल
SEBI अब निवेश सलाहकारों, रिसर्च एनालिस्टों और एल्गोरिदम प्रदाताओं पर भी पारदर्शिता के नए नियम लागू करने जा रहा है। पहले सलाहकार चुनिंदा अच्छे नतीजे दिखाकर निवेशकों को भ्रमित कर सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था में पूरी और सटीक जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिससे आम निवेशक सही निर्णय ले सकें।
SEBI के ये सुधार भारत को वैश्विक निवेश बाज़ार में एक भरोसेमंद और तकनीकी रूप से उन्नत गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं।