फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने भारत दौरे के दौरान भारतीय छात्रों के लिए बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या को वर्तमान में लगभग 10,000 से बढ़ाकर अगले कुछ वर्षों में 30,000 किया जाएगा। यह फैसला शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच तकनीकी व अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वीज़ा और प्रवेश प्रक्रिया में आसानियाँ
मैक्रों ने नई दिल्ली के एम्स (AIIMS) में कहा कि फ्रांस भारतीय छात्रों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को सरल बनाएगा और प्रवेश प्रक्रिया को भी आसान करेगा। इसका उद्देश्य यह है कि फ्रांस में पढ़ाई करना भारतीय छात्रों के लिए अधिक सुलभ और सुविधाजनक हो। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ज्यादा भारतीय छात्र फ्रांस जाएँ और फ्रांसीसी छात्र भारत आएँ।”
इस निर्णय के साथ फ्रांस ने संकेत दिया कि वह भारतीय छात्रों के लिए एक प्रमुख अध्ययन गंतव्य बनना चाहता है। वर्तमान में लगभग 10,000 भारतीय छात्र फ्रांस में पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन नए लक्ष्य के अनुसार यह संख्या तीन गुना बढ़ जाएगी।
अंग्रेज़ी में कोर्स और भाषा बाधा का समाधान
मैक्रों ने बताया कि फ्रांस अंग्रेज़ी में पढ़ाए जाने वाले कोर्स भी बढ़ाएगा। यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि भाषा की बाधा हमेशा से भारतीय छात्रों के लिए चुनौती रही है। अब बिज़नेस, इंजीनियरिंग, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में मास्टर्स प्रोग्राम अंग्रेज़ी में उपलब्ध होंगे। इससे भारतीय छात्रों के लिए फ्रांस में शिक्षा और भी आकर्षक बनेगी।
रिसर्च और अकादमिक सहयोग
फ्रांस ने भारतीय छात्रों को स्थापित रिसर्च सेंटर और इंटरडिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट्स तक पहुंच देने की योजना बनाई है। इससे छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट, ड्यूल डिग्री प्रोग्राम और संस्थागत साझेदारी बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
फ्रांस शिक्षा को भारत के साथ अपने व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक मुख्य स्तंभ मान रहा है। इसके तहत इंटर्नशिप, पोस्ट-स्टडी वर्क विकल्प और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अस्थायी निवास परमिट जैसी सुविधाओं पर भी चर्चा हो रही है।
प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में फ्रांस
फ्रांस के सार्वजनिक विश्वविद्यालय अमेरिका और ब्रिटेन की तुलना में शिक्षा शुल्क में सस्ते हैं। इसके साथ ही अंग्रेज़ी में कोर्स और आसान वीज़ा प्रक्रिया इसे भारतीय छात्रों के लिए और भी आकर्षक बनाती है। यह कदम फ्रांस को यूरोप में भारतीय छात्रों के लिए एक मजबूत विकल्प बनाने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है।
दीर्घकालिक लोगों-से-लोगों के संबंध
फ्रांस का यह निर्णय सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक लोगों-से-लोगों के संबंध बनाने का भी संकेत देता है। छात्रों के आदान-प्रदान से सांस्कृतिक और तकनीकी संबंध मजबूत होंगे और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे।
मैक्रों का यह कदम दिखाता है कि फ्रांस भारतीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए गंभीर है और आने वाले वर्षों में शिक्षा फ्रांस-भारत साझेदारी का केंद्रीय हिस्सा बनी रहेगी। भारतीय छात्रों के लिए अब फ्रांस में पढ़ाई का अवसर बढ़ा है, वीज़ा प्रक्रिया आसान है और रिसर्च एवं करियर विकल्प भी व्यापक हैं।