राष्ट्रपति भवन में देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें हिंदी में शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सहित तमाम केंद्रीय मंत्री और गणमान्य अतिथि मौजूद थे। उनके शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व सीजेआई बीआर गवई और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ समेत छह देशों- भूटान, केन्या, मलयेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट जज भी शामिल हुए।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने समारोह के बाद एक नई मिसाल पेश की। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी जस्टिस सूर्यकांत के लिए अपनी आधिकारिक कार छोड़ दी, ताकि नए मुख्य न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए कार उपलब्ध रहे। यह कदम न्यायपालिका में अनुकरणीय और ऐतिहासिक माना जा रहा है। शपथ ग्रहण के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य न्यायाधीश बनने पर बधाई दी और कहा कि उनका नेतृत्व संवैधानिक मूल्यों और कानून के राज को मजबूत करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले 14 महीने न्याय व्यवस्था के लिए बेहद अहम होंगे और हर नागरिक को न्याय का भरोसा मिलेगा।
CJI सूर्यकांत ने कई महत्वपूर्ण मामलों में अहम भूमिका निभाई है, जिनमें जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने से जुड़ा फैसला भी शामिल है। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा और इस दौरान न्यायपालिका के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले आने की संभावना है।