हिमालयन क्वेल (Himalayan Quail – Ophrysia superciliosa)
यह दुर्लभ पक्षी हिमालय के मुख्य रूप से उत्तराखंड में पाया जाता था।
यह छोटा, भूरा-धब्बेदार पक्षी घास के मैदानों में छिपकर रहता था।
आखिरी बार 1877 में देखा गया था।
कारण: अत्यधिक शिकार और जंगलों/घास के मैदानों का विनाश। अब इसे विलुप्त माना जाता है।

पिंक-हेडेड डक (Pink-headed Duck – Rhodonessa caryophyllacea)
यह अनोखा गुलाबी सिर वाला बत्तख भारत के दलदलों और तालाबों में पाया जाता था।
इसकी सुंदरता के कारण शिकारी इसे बहुत पसंद करते थे।
आखिरी पुष्टि 1930 के दशक में हुई, उसके बाद कोई विश्वसनीय दृष्टि नहीं।
कारण: शिकार, दलदलों का सूखना और आवास नष्ट होना। अब संभवतः विलुप्त।

जेरडन का कोर्सर (Jerdon’s Courser – Rhinoptilus bitorquatus)
यह छोटा, रात में सक्रिय पक्षी आंध्र प्रदेश के घने झाड़ी वाले इलाकों में रहता था।
इसकी आँखों के चारों ओर सफेद धारियां और अनोखी चाल इसे खास बनाती थी।
1871 के बाद लंबे समय तक नहीं देखा गया, फिर 1986 में दोबारा मिला लेकिन अब बहुत दुर्लभ।
कारण: जंगलों की कटाई और खेती के विस्तार से आवास खत्म। गंभीर संकटग्रस्त लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी संभावना।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard – Ardeotis nigriceps)
भारत का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के घास के मैदानों का निवासी।
पुरुष का वजन 15 किलो तक होता था, और यह शानदार नृत्य करता था।
अब केवल 100-150 बचे हैं, ज्यादातर राजस्थान में।
कारण: बिजली के तारों से टकराव, शिकार और घास के मैदानों में सोलर फार्म/खेती। विलुप्त होने की कगार पर।
