केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026–27 पेश किया, जिसमें शिक्षा मंत्रालय के लिए 1.39 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत अधिक है। कुल अनुमानित व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये में शिक्षा का हिस्सा लगभग 2.6 प्रतिशत है।
कुल आवंटन में से 83,562.26 करोड़ रुपये स्कूल शिक्षा और 55,727 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। स्कूल शिक्षा में 6.35 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 11.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य और फार्मा शिक्षा पर फोकस
बजट में 10,000 करोड़ रुपये के बायो-फार्मा सेक्टोरल डेवलपमेंट आउटले की घोषणा की गई है। इसके तहत फार्मास्यूटिकल शिक्षा, क्लिनिकल ट्रेनिंग और शोध को मजबूत किया जाएगा। तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित किए जाएंगे, जिससे इनकी संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी।
इसके अलावा सात मौजूदा NIPERs को उन्नत किया जाएगा और देशभर में मान्यता प्राप्त क्लिनिकल सुविधाओं का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
फ्लैगशिप योजनाओं को समर्थन
समग्र शिक्षा योजना के लिए 42,100 करोड़ रुपये, पीएम पोषण के लिए 12,750 करोड़ रुपये और पीएम श्री स्कूल्स के लिए 7,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मेंटल हेल्थ और आयुष शिक्षा
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तर भारत में एक नए NIMHANS जैसे संस्थान की स्थापना की जाएगी, जबकि रांची स्थित मौजूदा संस्थान का विस्तार किया जाएगा। आयुर्वेद शिक्षा के लिए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
नई स्किलिंग पहल
टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रोफेशनल स्किलिंग को बढ़ावा देने के लिए ICAI, ICSI और ICMAI जैसे संस्थानों द्वारा अल्पकालिक मॉड्यूलर कोर्स तैयार किए जाएंगे।
क्रिएटिव और डिजाइन सेक्टर
बजट में 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी (एनिमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएशन लैब्स स्थापित करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही पूर्वी भारत में एक नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) स्थापित किया जाएगा।
इक्विटी और इंफ्रास्ट्रक्चर
हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब्स में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जाएंगी।