सहारनपुर के फेमस मेडिकेयर अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद से जांच एजेंसियों को कई नए और हैरान करने वाले तथ्य मिले हैं। बताया जा रहा है कि डॉ. आदिल, जो मूल रूप से अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर) के रहने वाले हैं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकी नेटवर्क तैयार करने की साजिश में शामिल था। 7 नवंबर को गिरफ्तार किए गए डॉ. आदिल की जांच के दौरान एटीएस और खुफिया एजेंसियों ने कई संदिग्ध संपर्कों की पहचान की है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, वह पश्चिमी यूपी के कई डॉक्टरों के संपर्क में था, जिनमें कुछ जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी भी शामिल हैं। एजेंसियां अब इन सभी संबंधों की गहराई से जांच कर रही हैं।
सहारनपुर को क्यों चुना गया, यह भी एक बड़ा सवाल है। यह जिला रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है यहां एयरफोर्स स्टेशन, एयरपोर्ट, रिमाउंट डिपो और दारुल उलूम जैसे संस्थान मौजूद हैं। माना जा रहा है कि अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज की नौकरी छोड़कर डॉ. आदिल ने जानबूझकर सहारनपुर को अपना कार्यक्षेत्र बनाया ताकि गुप्त रूप से अपना नेटवर्क बढ़ा सके। गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद से विस्फोटक और हथियारों का जखीरा बरामद होने के बाद एजेंसियों का शक और गहरा गया है कि डॉ. आदिल का नेटवर्क पश्चिमी यूपी तक फैला हो सकता है।
वहीं, अस्पताल में उनके साथ काम करने वाले सहयोगियों डॉ. बाबर और एडमिन इंचार्ज डॉ. असलम जैदी ने अब अपनी ड्यूटी फिर से ज्वाइन कर ली है। उन्होंने बताया कि उन्हें डॉ. आदिल के आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने की कोई जानकारी नहीं थी। डॉ. बाबर ने कहा कि वे उसकी शादी में गए थे लेकिन उसे लेकर कभी कोई शक नहीं हुआ।
सहकर्मियों ने यह भी बताया कि डॉ. आदिल अक्सर कश्मीरी भाषा में बातचीत करता था पर उसके व्यवहार से कभी किसी को संदेह नहीं हुआ। गिरफ्तारी से ठीक पहले उसने यह कहकर छुट्टी ली थी कि उसकी मां बीमार हैं जिससे अब यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि शायद उसे पहले से अपनी गिरफ्तारी का आभास हो गया था। फिलहाल, एटीएस उसकी गतिविधियों, संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था या नहीं।