विन न्यूज़ नेटवर्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने जहां काम करने की रफ्तार को कई गुना बढ़ाया है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी यह एक बड़ा हथियार बनता जा रहा है। पहले किसी सिस्टम की कमजोरियां तलाशने और उस पर हमला करने में हमलावरों को काफी समय लगता था, लेकिन अब AI की मदद से यह प्रक्रिया बेहद तेजी से पूरी की जा रही है। माइक्रोसॉफ्ट की डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत दुनिया के टॉप-7 साइबर प्रभावित देशों में शामिल है। दुनिया भर में ट्रैक किए गए साइबर खतरों में भारत की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत रही।
एक साल में पांच गुना बढ़े रैनसमवेयर हमले
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में रैनसमवेयर हमलों में करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है। डिफेंस सेक्टर भी साइबर अपराधियों के निशाने पर है। इसके अलावा कंपनियों और आम यूजर्स को फिशिंग के नए तरीकों से निशाना बनाया जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसी सेवाओं पर खुद को आईटी सपोर्ट बताकर कर्मचारियों से जानकारी हासिल करने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। एक साल में टीम्स पर वॉइस फिशिंग के मामलों में 502 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
QR कोड से फिशिंग के 14.5 करोड़ प्रयास
साइबर अपराधियों ने अब ईमेल और पीडीएफ में QR कोड भेजकर यूजर्स को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यूजर जैसे ही संदिग्ध QR कोड स्कैन करता है, उसे फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 14.5 करोड़ QR फिशिंग हमलों को पकड़ा।
फेक CAPTCHA से भी हो रहा हमला
फर्जी CAPTCHA भी साइबर हमले का नया तरीका बन गया है। वेबसाइट पर ‘मैं रोबोट नहीं हूं’ जैसे संदेश या नकली एरर और अपडेट दिखाकर यूजर से एक कमांड कॉपी-पेस्ट करने के लिए कहा जाता है। इसके जरिए सिस्टम में खतरनाक गतिविधि शुरू की जा सकती है। रिपोर्ट में करीब 11 लाख डिवाइस पर ऐसी गतिविधियां मिलने की बात कही गई है। फेक CAPTCHA वाले हमले करीब आठ गुना बढ़े हैं।
बॉस और HR बनकर कर्मचारियों को बना रहे निशाना
साइबर अपराधी अब केवल बैंक या कंपनी की वेबसाइट की नकल करने तक सीमित नहीं हैं। वे कर्मचारी के बॉस, HR, पेरोल टीम, वेंडर या बिजनेस पार्टनर की पहचान बनाकर भी फर्जी संदेश और ईमेल भेज रहे हैं। अप्रैल से जून 2026 के बीच रिपोर्ट किए गए 85 प्रतिशत फिशिंग ईमेल में किसी व्यक्ति या संगठन की पहचान की नकल किए जाने की बात सामने आई।
AI एजेंट खुद तैयार कर रहे हमले की रणनीति
रिपोर्ट में AI आधारित साइबर हमलों के एक नए खतरे का भी उल्लेख है। एक लैब टेस्ट में कई AI एजेंट ने मिलकर कंपनी के नेटवर्क पर 32 चरणों वाला साइबर हमला तैयार किया और उसे खुद पूरा किया। इस दौरान सर्वर और यूजर अकाउंट पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की गई।
सॉफ्टवेयर की कमजोरी पर 24 घंटे से कम में हमला
साइबर सुरक्षा के सामने एक और बड़ी चुनौती यह है कि सॉफ्टवेयर में कमजोरी सामने आने के बाद उस पर हमला होने का औसत समय 24 घंटे से भी कम रह गया है। यानी कंपनियों के पास सुरक्षा अपडेट लागू करने और सिस्टम को सुरक्षित करने के लिए पहले की तुलना में बहुत कम समय बच रहा है।
दो साल में 130 करोड़ AI एजेंट का अनुमान
कंपनियों में AI एजेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 88 प्रतिशत कंपनियां AI एजेंट को आजमा रही हैं और 82 प्रतिशत कारोबारी लीडर अगले 12 से 18 महीनों में इसका इस्तेमाल बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। अनुमान है कि अगले दो साल में AI एजेंट की संख्या 130 करोड़ तक पहुंच सकती है। ये एजेंट ईमेल, कैलेंडर, सिस्टम अपडेट और डेटा एक्सेस जैसे काम कर सकते हैं। ऐसे में इन पर होने वाला हमला जुड़े सिस्टम और संवेदनशील डेटा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।