CRI : आत्मनिर्भर भारत फंड योजना – ठोस बिजनेस प्लान हो, तो पूंजी दिलवाएगी सरकार

फंड के तहत केंद्र 10 हजार करोड़ और निजी इक्विटी/ वेंचर कैपिटल फंड 40 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान करता है। यह फंड इक्विटी या अर्थ इक्विटी निवेश के लिए 'मदर-फंड' और 'डॉटर फंड के माध्यम से ऑपरेट होता है।

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CRI : आत्मनिर्भर भारत फंड योजना - ठोस बिजनेस प्लान हो, तो पूंजी दिलवाएगी सरकार

नई दिल्ली : केंद ने एमएसएमई (छोटे-मझोले उद्योग) सेक्टर के लिए एसआरआई यानी आत्मनिर्भर भारत फंड योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य एमएसएमई को शुरुआती इक्विटी पूंजी मुहैया कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और आगे बढ़ने में मदद करना है। इसके जरिये उन एमएसएमई को सहायता दी जाती है, जिनमें ग्रोथ की संभावना होती है और जो भविष्य में बड़ा बिजनेस बनने की क्षमता रखते हैं।

‘मदर फंड’ और ‘डॉटर फंड’ के माध्यम से की जाती है एमएसएमई की मदद
फंड के तहत केंद्र 10 हजार करोड़ और निजी इक्विटी/ वेंचर कैपिटल फंड 40 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान करता है। यह फंड इक्विटी या अर्थ इक्विटी निवेश के लिए ‘मदर-फंड’ और ‘डॉटर फंड के माध्यम से ऑपरेट होता है। एनएसआईसी वेंचर कैपिटल फंड (एनवीसीएफएल) एसआरआई में मदर फंड का काम करता है।

पंजीगत मदद का पैसा पहले प्राइवेट इक्विटी फंड में, फिर लाभार्थी को
मदर-फंड का काम सीधे एमएसएमई में निवेश करना नहीं है। इसके बजाय यह विभिन्न प्राइवेट इक्विटी (पीई) फंड और वेंचर कैपिटल (बीसी) फंड में निवेश करता है, जिन्हें ‘डॉटर-फंड’ कहा जाता है। ‘डॉटर फंड्स’ एमएसएमई में निवेश करने के लिए अधिक एक्सपर्ट होते हैं।

भविष्य में ग्रोथ की अच्छी संभावना हो तभी मिल पाएगी इक्विटी पूंजी की मदद
डॉटर फंड्स का मुख्य उद्देश्य उन एमएसएमई की पहचान करना है जिनमें ग्रोथ की अच्छी क्षमता होती है। इसके बाद उन्हें जरूरी इक्विटी पूंजी मुहैया कराई जाती है। इन डॉटर- फंड्स को एसआरआई फंड से प्राप्त पूंजी योगदान का कम कम 5 गुना एमएसएमई में निवेश करना होता है।

एमएसएमई को निवेश हासिल करने के लिए उठाने होंगे ये जरूरी कदम….

उद्यमी के पास अनिवार्य रूप से उद्यम [रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, जो एमएसएमई होने का प्रमाण है। आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
मजबूत और विस्तृत बिजनेस प्लान तैयार करें। इसमें बिजनेस का विवरण, पूंजी की अनुमति जरूरत प्रे स्ट्रैटजी मैनेजमेंट टीम और आप निवेश का उपयोग कैसे करेंगे, इसका स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
उन वेंचर कैपिटल उद्यमी और पीई फंड्स की पहचान करें जो एमएसएमई सेक्टर में निवेश करते हैं।
भारतीय वेंचर कैपिटल एसोसिएशन (आईबीसीए) जैसी संस्थाओं की वेबसाइट्स देखों, जो देश में सक्रिय बीसी/ पीई फंड्स की लिस्ट मुहैया कराती है।
एनबीसीएफएल की वेबसाइट पर नजर रखें। ये उन ‘डॉटर-फंड्स’ की जानकारी साझा कर सकती है, जिनमें उसने निवेश कर रखा है।
पहचाने गए फंड्स की वेबसाइट्स पर जाएं और उनकी निवेश प्रक्रिया, फोकस क्षेत्र और संपर्क जानकारी देखें।
अपनी व्यावसायिक योजना के साथ एक प्रभावी संक्षिप्त प्रेजेंटेशन तैयार करें।
सीधे फंड्स से वेब फॉर्म मिल या कॉन्टेक्ट पर्सन के माध्यम से संपर्क करें। उद्योग के सम्मेलनों में हिस्सा लें।
उन औद्योगिक कार्यक्रम, एमएसएमई शिखर सम्मेलन और स्टार्टअप इवेंट में हिस्स से, जहां निवेशक मौजूद ह सरकार समर्थित इनक्यूबेटर या एक्सेलरेटर कार्यक्रमों में हिस्सा लें। ये अक्सर निवेशकों से जुड़ने के मौके देते हैं।
अपडेट के लिए समय-समय पर एमएसएमई की वेबसाइट https://mme.gov.in/ और एनएसआईसी की वेबसाइट https://nsic.co.in/ पर जाएं।

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