भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बार मुद्दा है रोहित शर्मा को वनडे कप्तानी से हटाया जाना और इसके पीछे की जिम्मेदारी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने इस फैसले पर खुलकर सवाल उठाए हैं और सीधे तौर पर टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर तथा मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। तिवारी का मानना है कि यह फैसला न केवल रोहित शर्मा का अपमान है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो सकता है।
रोहित शर्मा का आखिरी मुकाबला वनडे कप्तान के रूप में 2025 चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल था, जहां भारत ने खिताब जीता था। इस जीत के साथ रोहित ने कप्तान के तौर पर अपना दूसरा आईसीसी ट्रॉफी जीता और वह एमएस धोनी के बाद ऐसे दूसरे भारतीय कप्तान बने जिनके नाम एक से ज्यादा व्हाइट बॉल आईसीसी खिताब हैं। इसके बावजूद भारतीय टीम प्रबंधन ने भविष्य की तैयारी का हवाला देते हुए रोहित को कप्तानी से हटाने का फैसला लिया और उनसे 12 साल छोटे शुभमन गिल को नया वनडे कप्तान नियुक्त कर दिया।
मनोज तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला केवल चयन समिति का नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अजीत अगरकर जैसे व्यक्तित्व वाले चयनकर्ता बिना किसी प्रभाव के ऐसा बड़ा कदम नहीं उठाते। तिवारी के मुताबिक, कहीं न कहीं इस फैसले के पीछे गौतम गंभीर की भूमिका भी रही है और इसलिए जिम्मेदारी दोनों की बराबर बनती है।
स्पोर्ट्स टुडे से बातचीत में तिवारी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि इस फैसले की असली वजह क्या थी, लेकिन वह अजीत अगरकर को एक मजबूत निर्णय लेने वाला व्यक्ति मानते हैं। उनके अनुसार, अगरकर आमतौर पर फैसलों से पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। हालांकि तिवारी ने यह भी संकेत दिया कि कई बार पर्दे के पीछे बहुत कुछ चलता है और संभव है कि गंभीर के सुझावों या प्रभाव में यह निर्णय लिया गया हो। उनका कहना था कि कोच के इनपुट के बिना कोई भी चयनकर्ता इतना बड़ा फैसला अकेले नहीं ले सकता।
तिवारी ने साफ कहा कि चाहे फैसला चयनकर्ता का हो या कोच का, जिम्मेदारी दोनों की बराबर है। उन्होंने इसे “कंधे से बंदूक चलाने” जैसा करार दिया, यानी फैसले की औपचारिक जिम्मेदारी किसी और पर हो, लेकिन असली भूमिका किसी और की हो सकती है। इस टिप्पणी के बाद यह बहस और गहरी हो गई है कि भारतीय टीम में असल शक्ति संतुलन किसके हाथ में है।
पूर्व बल्लेबाज ने यह भी कहा कि रोहित शर्मा को कप्तानी से हटाए जाने के बाद उनका खुद का वनडे क्रिकेट से मोहभंग हो गया है। तिवारी के मुताबिक, इस फैसले के बाद टीम में कई चीजों को लेकर स्पष्टता नहीं रही, जिससे लगातार विवाद पैदा हो रहे हैं। उन्होंने इसे भारतीय क्रिकेट प्रबंधन की योजना की कमी से जोड़ा।
मनोज तिवारी का सबसे कड़ा हमला इस बात पर था कि टीम प्रबंधन ने रोहित शर्मा की बल्लेबाजी क्षमता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर 2027 विश्व कप को लेकर रोहित को लेकर संदेह था, तो इसका सीधा मतलब है कि उनकी क्षमता पर शक किया गया। तिवारी ने इस सोच को पूरी तरह गलत बताया।
उन्होंने याद दिलाया कि रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक लगाने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं और ऐसे बल्लेबाज की क्षमता पर सवाल उठाना समझ से परे है। तिवारी के अनुसार, बड़े खिलाड़ी हमेशा बड़े मौकों पर रन बनाते हैं और रोहित ने यह बार-बार साबित किया है। उन्होंने कहा कि 2023 विश्व कप में रोहित जिस मानसिकता के साथ खेले, वह पूरी तरह निस्वार्थ थी। उन्होंने टीम के लिए आक्रामक शुरुआत दी और व्यक्तिगत रिकॉर्ड की चिंता नहीं की।
तिवारी ने कहा कि रोहित जैसे खिलाड़ी का सम्मान किया जाना चाहिए था, न कि उन्हें संदेह की नजर से देखा जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, कप्तानी से हटाना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि यह उस खिलाड़ी के योगदान को कमतर आंकने जैसा था, जिसने सालों तक भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को खुशी दी है।
पूर्व क्रिकेटर ने यह भी जोड़ा कि रोहित को कप्तानी से हटाने के पीछे कोई ठोस क्रिकेटिंग लॉजिक नजर नहीं आता। जब एक कप्तान लगातार टीम को आईसीसी ट्रॉफी जितवा रहा हो, तो उसे अचानक हटाने का फैसला समझ से बाहर है। तिवारी ने इसे सीधे तौर पर एक बड़ी गलती करार दिया।
उनका कहना था कि अगर टीम प्रबंधन को भविष्य के लिए तैयारी करनी थी, तो इसके और भी तरीके हो सकते थे। युवा कप्तान को धीरे-धीरे तैयार किया जा सकता था, बिना मौजूदा सफल कप्तान को हटाए। तिवारी के मुताबिक, इस फैसले से न केवल रोहित की छवि को ठेस पहुंची, बल्कि टीम के भीतर भी गलत संदेश गया।
रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने हाल के वर्षों में व्हाइट बॉल क्रिकेट में स्थिरता दिखाई थी। उनकी अगुआई में टीम का माहौल संतुलित रहा और खिलाड़ी खुलकर खेले। ऐसे में अचानक बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।
गौतम गंभीर की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है। गंभीर अपने स्पष्ट और आक्रामक विचारों के लिए जाने जाते हैं। कोच बनने के बाद से ही वह टीम के भविष्य को लेकर बड़े फैसले लेने के पक्षधर रहे हैं। मनोज तिवारी के बयान ने यह संकेत दिया है कि गंभीर का प्रभाव चयन समिति के फैसलों पर पड़ सकता है, चाहे वह औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाए या नहीं।
अजीत अगरकर, जो खुद एक पूर्व तेज गेंदबाज और अनुभवी क्रिकेटर रहे हैं, को एक सख्त और निर्णायक चयनकर्ता माना जाता है। लेकिन तिवारी का मानना है कि इतने बड़े फैसले में केवल एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि चयनकर्ता और कोच दोनों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद ने भारतीय क्रिकेट में पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशंसक और विशेषज्ञ यह जानना चाहते हैं कि आखिर किस आधार पर रोहित शर्मा को कप्तानी से हटाया गया, जब उनके प्रदर्शन और रिकॉर्ड दोनों मजबूत थे।
फिलहाल शुभमन गिल को भविष्य का कप्तान मानकर आगे बढ़ने की योजना बनाई गई है। गिल युवा हैं, प्रतिभाशाली हैं और उनमें नेतृत्व क्षमता देखी जा रही है। लेकिन मनोज तिवारी जैसे पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि भविष्य की तैयारी के नाम पर वर्तमान को नजरअंदाज करना सही नहीं है।
रोहित शर्मा को लेकर यह विवाद आने वाले समय में और गहराने की संभावना है। खासकर तब, जब 2027 विश्व कप की तैयारियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम प्रबंधन इस फैसले पर सफाई देता है या नहीं, और रोहित शर्मा आगे किस भूमिका में भारतीय क्रिकेट का हिस्सा बने रहते हैं।
एक बात साफ है कि मनोज तिवारी के बयान ने गौतम गंभीर और अजीत अगरकर दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह केवल एक खिलाड़ी की कप्तानी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट की सोच, सम्मान और निर्णय प्रक्रिया से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।