विन न्यूज़ नेटवर्क। ब्रेस्ट कैंसर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में महिलाओं की तस्वीर आती है, लेकिन यह बीमारी पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले महिलाओं की तुलना में काफी कम होते हैं, लेकिन कम जोखिम का मतलब यह नहीं है कि इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, छाती में गांठ, निप्पल में बदलाव या असामान्य डिस्चार्ज जैसे संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। कई बार जानकारी की कमी, झिझक और लापरवाही के कारण पुरुष डॉक्टर के पास जाने में देर कर देते हैं। ऐसे में बीमारी की पहचान और इलाज प्रभावित हो सकता है।
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आम लक्षण छाती में, खासकर निप्पल के आसपास, सख्त गांठ महसूस होना है। यह गांठ अक्सर दर्द रहित हो सकती है, इसलिए इसे सामान्य सूजन समझकर छोड़ना ठीक नहीं है। इसके अलावा शरीर में होने वाले कुछ बदलाव भी इस बीमारी का संकेत हो सकते हैं।
- छाती में गांठ: निप्पल के पास या छाती के ऊतकों में नई गांठ महसूस होना।
- निप्पल में बदलाव: निप्पल का अचानक अंदर की ओर धंसना या उसका आकार बदलना।
- त्वचा में परिवर्तन: छाती की त्वचा पर लालिमा, पपड़ी या गड्ढे जैसी बनावट दिखाई देना।
- निप्पल से डिस्चार्ज: निप्पल से तरल निकलना, खासकर खून मिला हुआ डिस्चार्ज।
- बगल में सूजन: बगल में गांठ या सूजन महसूस होना, जो लिम्फ नोड्स में बदलाव का संकेत हो सकती है।
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती।
क्या छाती की हर गांठ कैंसर होती है?
छाती में गांठ महसूस होने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। पुरुषों में गाइनेकोमैस्टिया नाम की स्थिति भी हो सकती है, जिसमें हार्मोन के असंतुलन के कारण स्तन ऊतक बढ़ जाते हैं। इसमें निप्पल के आसपास सूजन या गांठ जैसा एहसास हो सकता है।
इसके बावजूद, नई गांठ को बिना जांच के सामान्य मान लेना जोखिम भरा हो सकता है। डॉक्टर शारीरिक जांच के साथ जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी या बायोप्सी जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। सही कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
पुरुष क्यों नजरअंदाज कर देते हैं ब्रेस्ट कैंसर के संकेत?
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले कम होने के कारण बहुत से लोग इस बीमारी के बारे में जागरूक नहीं होते। कुछ लोग छाती में गांठ को हार्मोनल बदलाव या सामान्य सूजन मान लेते हैं। वहीं, कुछ पुरुष सामाजिक झिझक या शर्म के कारण डॉक्टर से अपनी परेशानी साझा करने से बचते हैं।
कई बार गांठ में दर्द नहीं होने के कारण भी लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन दर्द का न होना किसी गांठ के सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है। इसलिए लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय समय पर जांच कराना बेहतर है।
समय पर पहचान से इलाज में मिल सकती है मदद
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज बीमारी के प्रकार, स्टेज और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों पर निर्भर करता है। उपचार में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। कई पुरुषों में कैंसर हार्मोन रिसेप्टर-पॉजिटिव होता है, ऐसे मामलों में डॉक्टर हार्मोन थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।
बीमारी का पता शुरुआती चरण में चलने पर इलाज की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलाज का परिणाम कैंसर की स्थिति और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
छाती में बदलाव दिखे तो डॉक्टर से कब मिलें?
अगर छाती में नई गांठ महसूस हो, निप्पल अंदर की ओर धंसने लगे, त्वचा में असामान्य बदलाव आए या निप्पल से खून निकले, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। बगल में गांठ या लगातार बनी रहने वाली सूजन को भी नजरअंदाज न करें।
याद रखें, पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर दुर्लभ जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। जागरूकता, लक्षणों की पहचान और समय पर चिकित्सकीय जांच इस बीमारी से निपटने में अहम भूमिका निभाते हैं। किसी भी बदलाव को शर्म या झिझक के कारण छिपाने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना ही समझदारी है।