बिहार विधानसभा ने भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार को नए स्पीकर के रूप में सर्वसम्मति से चुना है। मंगलवार को हुई इस प्रक्रिया में प्रेम कुमार अकेले नामांकित उम्मीदवार थे, और इसलिए उन्हें निर्विरोध चुना गया। इस फैसले की जानकारी अस्थायी अध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने सदन को दी। उन्होंने कहा कि स्पीकर पद के लिए सिर्फ प्रेम कुमार का नाम सामने आया, जिसके बाद सदन ने उन्हें बिना किसी विरोध के इस महत्वपूर्ण पद के लिए स्वीकार कर लिया।
सदन में स्पीकर पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने पारंपरिक रूप से प्रेम कुमार को अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँचाया। यह क्षण विधानसभा के लिए एक प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक क्षण रहा, क्योंकि दोनों मुख्य राजनीतिक दलों ने मिलकर उन्हें सम्मानित किया।
प्रेम कुमार की राजनीतिक यात्रा बिहार में लंबे समय से चर्चा में रही है। वे लगातार कई बार विधायक चुने गए हैं और उनका राजनीतिक अनुभव उन्हें स्पीकर के रूप में बेहद सक्षम बनाता है। उन्होंने विभिन्न विभागों में मंत्री के रूप में भी काम किया है और एक समय विपक्ष के नेता के रूप में विधानसभा संचालन का अनुभव हासिल किया है। उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना गया।
निर्विरोध चुने जाने के बाद सदन में उत्साह और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रेम कुमार ने सदस्यों को अपना पहला संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सम्मान का पल नहीं है, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सदन में निष्पक्षता बनाए रखने और सभी दलों को समान अवसर देने का आश्वासन दिया। उनका कहना था कि विधानसभा को विकास, न्याय और लोकतांत्रिक निर्णयों के लिए एक प्रभावी मंच बनाना उनका प्राथमिक लक्ष्य होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रेम कुमार का निर्विरोध चयन राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिरता और सहयोग को दर्शाता है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की मजबूती इस चुनाव में स्पष्ट दिखी। इससे विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी और आगामी नीतियों और बजट सत्रों में सहज संवाद सुनिश्चित होगा।
प्रेम कुमार की इस उपलब्धि से यह भी संकेत मिलता है कि बिहार विधानसभा में सदस्यों के बीच भरोसा और सम्मान कायम है। उनका अनुभव, संयम और राजनीतिक समझदारी सदन की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में सहायक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि सदन में सभी दलों की आवाज सुनी जाए और विकास और जनता की भलाई से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाए।
इसके अलावा, उपस्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया 4 दिसंबर को होने वाली है। यह कदम इस बात को सुनिश्चित करेगा कि विधानसभा की कार्यवाही में कोई व्यवधान न आए और सभी दलों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेम कुमार के नेतृत्व में विधानसभा में अनुशासन, निष्पक्ष निर्णय और विकास संबंधी बहसों को प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रेम कुमार का निर्विरोध चयन केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि विधानसभा के लोकतांत्रिक और पारंपरिक मूल्यों का सम्मान भी माना जा रहा है। उनके अनुभव और जनप्रियता के चलते यह उम्मीद जताई जा रही है कि वे स्पीकर के रूप में बिहार विधानसभा को और सशक्त बनाएंगे। विधानसभा के लिए यह एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसमें सभी पक्षों के सहयोग और संतुलित निर्णयों की दिशा में काम किया जाएगा।
प्रेम कुमार का चुनाव राज्य की राजनीति में स्थिरता और सहयोग के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। उनके नेतृत्व में सदन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक व्यवहार और विकास केंद्रित निर्णय लेने की संभावना और बढ़ गई है। यह कदम बिहार विधानसभा के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो आगामी सत्रों में राज्य की राजनीति और जनहित के मुद्दों पर प्रभावशाली निर्णयों की दिशा में मार्गदर्शन करेगा।