आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर देश और दुनिया में लगातार यह चिंता जताई जा रही है कि आने वाले समय में मशीनें इंसानों की नौकरियां छीन लेंगी। खासकर युवाओं और नौकरीपेशा वर्ग के बीच यह डर तेजी से बढ़ा है। हालांकि संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने इस आशंका को काफी हद तक खारिज किया है।
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, भारत जैसे श्रम-प्रधान और युवा आबादी वाले देश में AI बड़े पैमाने पर नौकरियों को खत्म नहीं करेगा। इसके उलट, AI कई क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ नए रोजगार अवसर भी पैदा करेगा।
रोजगार पर कोई बड़ा संकट नहीं
सर्वे में कहा गया है कि अब तक के वैश्विक और घरेलू आंकड़े यह संकेत नहीं देते कि AI के कारण रोजगार पर कोई गंभीर संकट आने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में मानव श्रम, कौशल और अनुभव की भूमिका इतनी अहम है कि AI उसे पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकता।
हालांकि सर्वे यह भी स्वीकार करता है कि कुछ दोहराए जाने वाले और रूटीन कार्य ऑटोमेशन के दायरे में आ सकते हैं। लेकिन इसे व्यापक स्तर पर नौकरी खत्म होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
डेमोग्राफिक डिविडेंड और रोजगार की जरूरत
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का सही लाभ उठाने के लिए हर साल करीब 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी। इसके लिए केवल डिग्री आधारित शिक्षा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अपस्किलिंग और री-स्किलिंग आने वाले वर्षों में रोजगार की स्थिरता के लिए सबसे अहम कारक होंगे।
किन क्षेत्रों में AI की सीमाएं
सर्वे में कई ऐसे सेक्टरों की पहचान की गई है, जहां AI की भूमिका सीमित रहेगी। हेल्थकेयर और केयर सेक्टर इसका प्रमुख उदाहरण हैं। बुजुर्गों की देखभाल, नर्सिंग, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और सामाजिक सेवाओं में मानवीय संवेदनाएं और निर्णय क्षमता सबसे अहम होती हैं।
इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी छोटे बच्चों की पढ़ाई, विशेष जरूरतों वाले छात्रों की ट्रेनिंग और मेंटरिंग जैसे कार्यों में इंसानों की भूमिका बनी रहेगी।
हैंड्स-ऑन और क्रिएटिव जॉब्स सुरक्षित
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल वर्क, कंस्ट्रक्शन, रिपेयर और मेंटेनेंस जैसे हैंड्स-ऑन कार्यों में AI की पहुंच सीमित है। इन पेशों में हर स्थिति अलग होती है, जहां मौके के हिसाब से निर्णय लेना जरूरी होता है।
इसके अलावा क्रिएटिव और नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों में भी AI इंसानों की जगह नहीं ले सकता। आर्टिसन वर्क, इनोवेशन, नेतृत्व, नीति-निर्माण और AI गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में मानवीय सोच और अनुभव की आवश्यकता बनी रहेगी।
युवाओं के लिए संदेश
इकोनॉमिक सर्वे का संदेश स्पष्ट है कि AI से डरने के बजाय उसे अपनाने की जरूरत है। यदि युवा नई तकनीकों के साथ अपने कौशल को लगातार अपडेट करते हैं, तो AI उनके लिए खतरा नहीं बल्कि एक अवसर साबित हो सकता है।