बागपत : भारतीय नौसेना ने आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम में दूसरे बुनियादी हॉक कन्वर्जन पाठ्यक्रम के समापन का समारोह मनाया। गुरुवार को लेफ्टिनेंट अतुल कुमार ढुल और सब-लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया को रियर एडमिरल जनक बेवली, एसीएनएस (एयर) से प्रतिष्ठित ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ प्रदान किया। सब-लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया सभी बाधाओं को पार करते हुए और नौसेना में महिला फाइटर पायलटों के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करते हुए नौसेना विमानन की फाइटर स्ट्रीम में शामिल होने वाली पहली महिला बनीं।
उल्लेखनीय है कि भारतीय नौसेना ने पहले ही एमआर विमान और हेलीकॉप्टरों में पायलट और नौसेना वायु संचालन अधिकारियों के रूप में महिला अधिकारियों को शामिल किया है। सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया को फाइटर स्ट्रीम में शामिल करना नौसेना विमानन में लैंगिक समावेशिता, नारी शक्ति, समानता और अवसर की संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यूपी के बागपत की बेटी आस्था पूनिया में भारतीय नौ सेना की पहली महिला फाइटर पायलट बनी। आस्था पूनिया को विंग्स ऑफ गोल्ड सम्मान दिया गया। अब वह भारतीय नौसेना की लड़ाकू विमानों की पायलट बन गई हैं। आस्था के माता-पिता सरकारी टीचर हैं। परिवार में एक छोटा भाई भी है। फैमिली पिछले 12 साल से मेरठ में रह रही है। शुरुआत से ही आस्था का सपना भारतीय नौसेना में जाने का था।
आस्था के पिता अरुण पूनिया मेरठ के सरधना स्थित नवोदय विद्यालय में अध्यापक हैं। मां संयोगिता चौधरी भी प्राथमिक विद्यालय में सरकारी शिक्षिका हैं। छोटा भाई अनमोल अभी पढ़ाई कर रहा है। आस्था ने मेरठ से ही अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद राजस्थान में रहकर डिफेंस की तैयारी की थी।
3 जुलाई को बिशाखापत्तनम में स्थित आईएनएस डेगा में द्वितीय बेसिक हाक कन्वर्जन कोर्स का समापन हुआ, जिसमें आस्था को विंग्स ऑफ गोल्ड सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें रियर एडमिरल जनक बेवली ने सौंपा। यह सम्मान सिर्फ नौसेना के लड़ाकू विमानों के पायलटों को प्राप्त होता है।
पिता अरुण पूनिया ने बताया, आस्था ने इंटरमीडिएट के बाद से ही डिफेंस की तैयारी शुरू कर दी थी। वह बचपन से ही नौ सेना में जाना चाहती थी। एक साल पहले उसका चयन नौ सेना में ऑफिसर ग्रेड पर हुआ था। इसके बाद उसने फाइटर पायलट बनने के लिए अटैचमेंट कोर्स किया।
आस्था की शुरुआती पढ़ाई बागपत से हुई थी। मैट्रिक गिरधारी लाल पब्लिक स्कूल और इंटरमीडिएट एसडी पब्लिक स्कूल से किया था। 12वीं के बाद दो साल पहले नौसेना के लिए आवेदन किया था। मां संयोगिता चौधरी का कहना है,बच्चों का सपना पूरा करना ही हमारी सबसे बड़ी खुशी है। आस्था ने अपनी मेहनत से यह साबित किया कि लड़की भी किसी से कम नहीं है। चाचा अजय पूनिया और विकास पूनिया ने बताया- यह हमारे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात है। हम सभी आस्था की सफलता से बहुत खुश हैं। वहीं आस्था के नाना नाना राजेंद्र सिंह और जयकरण सिंह ने भी ननिहाल में इस खुशी को धूमधाम से मनाया।
आस्था के दादा बुद्ध प्रकाश चौधरी ने बताया, आस्था शुरुआत से ही बड़ी होनहार थी। गांव आती थी तो मुझसे सेना के बारे में पूछती थी। बचपन में जब आसमान में हवाई जहाज उड़ते हुए देखती थी तो बोलती थी- दादू… एक दिन मैं भी जहाज उड़ाउंगी। आज उसने अपना सपना साकार कर लिया।
आस्था ने कहा, लड़कियों को खुद को कभी कमतर नहीं आंकना चाहिए। अगर इरादा मजबूत हो तो हर लक्ष्य को पाया जा सकता है। लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं।