विन न्यूज़ नेटवर्क। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का आगाज आज यानी 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को धनतेरस के साथ हो रहा है। सनातन परंपरा में इस दिन का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
धनतेरस पर माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार को उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
सात साल बाद बना विशेष ज्योतिषीय संयोग
इस वर्ष धनतेरस पर हस्त नक्षत्र, विश्व योग और शुक्र प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुभ योग में पूजा-पाठ और दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, धनतेरस पर प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि के दौरान माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
धनतेरस पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर पूजा के लिए शाम का समय सबसे उत्तम बताया गया है। शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इस दौरान स्थिर वृषभ लग्न होने के कारण लक्ष्मी-कुबेर पूजन का विशेष महत्व है।
पूजा से जुड़े प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
- प्रदोष काल: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक।
- वृषभ काल: शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक।
- मुख्य पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक।
सोना-चांदी और बर्तन खरीदने का शुभ समय
धनतेरस पर सोना, चांदी, आभूषण और धातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक होती हैं। इस बार खरीदारी के लिए कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त बताए गए हैं।
- प्रातः मुहूर्त: सुबह 10:30 बजे से 10:43 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक।
- शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 1:27 बजे तक।
- अपराह्न चर मुहूर्त: शाम 4:11 बजे से 5:33 बजे तक।
खरीदारी का बताया गया विस्तृत शुभ समय 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे से 7 नवंबर सुबह 6:37 बजे तक है।
इस विधि से करें माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा
धनतेरस की शाम घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान कुबेर, भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें। शुभ मुहूर्त में दीप प्रज्वलित कर पूजा आरंभ करें। सभी देवी-देवताओं को तिलक लगाएं और पुष्प, फल तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
माता लक्ष्मी और कुबेर देव को सफेद मिठाई तथा भगवान धन्वंतरि और गणेश जी को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाने की परंपरा बताई गई है। पूजा के दौरान ‘ॐ ह्रीं कुबेराय नमः’ मंत्र का जाप करें। भगवान धन्वंतरि की कृपा प्राप्त करने के लिए धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे प्रारंभ होकर 7 नवंबर को लगभग सुबह 11 बजे तक रहेगी। धनतेरस पर प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि का संयोग पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना कर सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना कर सकते हैं।