प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाला लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ एक बार फिर देशभर के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। दिल्ली से लेकर मणिपुर, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड तक इस कार्यक्रम का व्यापक असर देखने को मिला। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इसे परीक्षा के तनाव से निपटने और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए बेहद उपयोगी बताया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने छात्रों को यह संदेश दिया कि परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अंक महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन उनसे जीवन की पूरी दिशा तय नहीं होती। यह संदेश खासकर उन छात्रों के लिए राहत भरा रहा, जो परीक्षा और परिणाम को लेकर अत्यधिक दबाव महसूस करते हैं।
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल कक्षा 10वीं के एक छात्र ने बताया कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ से उसे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को लेकर नया नजरिया मिला। उसके अनुसार, प्रधानमंत्री ने तनाव प्रबंधन को बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि परीक्षा, करियर और भविष्य को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन डर के साथ पढ़ाई करना सही नहीं है।
एक अन्य छात्र, जो लगातार अच्छे अंक लाता रहा है, ने साझा किया कि टॉपर बने रहने का दबाव कई बार आत्मविश्वास को कमजोर कर देता है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के माध्यम से उसे यह समझ आया कि असफलता भी सीखने का अवसर होती है और परीक्षा को जीवन से बड़ा नहीं बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने पढ़ाई को रटने की बजाय विषय को समझने पर जोर दिया। उन्होंने समय प्रबंधन, नियमित रिवीजन और संतुलित दिनचर्या को सफलता की कुंजी बताया। छात्रों को यह भी सलाह दी गई कि वे खुद की तुलना दूसरों से न करें, बल्कि अपनी क्षमता को पहचानें और उसी के अनुसार लक्ष्य तय करें।
दिल्ली के आरके पुरम क्षेत्र के मोती बाग स्थित स्कूल में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी छात्रों से संवाद करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि परीक्षा का डर मन से निकालना सबसे जरूरी है। आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था बच्चों में सोचने, प्रयोग करने और नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, ताकि वे असफलता के डर के बिना आगे बढ़ सकें।
मणिपुर की राजधानी इंफाल में भी ‘परीक्षा पे चर्चा’ को लेकर उत्साह देखा गया। वहां के एक छात्र ने बताया कि उनके स्कूल में इस कार्यक्रम का आयोजन होना गर्व की बात है। राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मणिपुर के सभी 17 जिलों के स्कूलों में छात्र और शिक्षक इस कार्यक्रम से जुड़े।
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री माणिक साहा ने छात्रों से बातचीत की। उन्होंने सकारात्मक सोच, अनुशासन और तनाव नियंत्रण के साथ परीक्षा देने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मविश्वास के साथ की गई तैयारी ही सफलता की राह दिखाती है।
बिहार की राजधानी पटना में भी छात्रों ने ऑनलाइन माध्यम से ‘परीक्षा पे चर्चा’ को सुना। छात्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की बातों से उन्हें मानसिक मजबूती मिली। वहीं शिक्षा से जुड़े संगठनों ने कहा कि यह कार्यक्रम वर्षों से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
झारखंड की राजधानी रांची में भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखा। शिक्षकों के अनुसार, इस कार्यक्रम से छात्रों को यह समझ आया कि परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि उत्सव की तरह लेना चाहिए। कुल मिलाकर, ‘परीक्षा पे चर्चा’ ने देशभर के छात्रों को तनाव से मुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।