उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं को राहत देते हुए यह अवधि अब 6 मार्च 2026 तक कर दी है। इससे पहले मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन कराने या नाम कटवाने के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 6 फरवरी 2026 निर्धारित की गई थी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) उत्तर प्रदेश नवदीप रिणवा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि समय सीमा बढ़ाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य मतदाता मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि इस दौरान मतदाता फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8 के माध्यम से आवश्यक बदलाव या दावे दर्ज करा सकते हैं।
कौन-सा फॉर्म किसके लिए
- फॉर्म 6: नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए
- फॉर्म 7: मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए
- फॉर्म 8: मतदाता विवरण में संशोधन के लिए (नाम, पता, आयु आदि)
अक्टूबर से चल रहा है SIR अभियान
सीईओ नवदीप रिणवा के अनुसार, उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 से की गई थी। इसके तहत मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करने का लक्ष्य रखा गया।
इसके बाद 4 नवंबर 2025 से घर-घर जाकर गणना (डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन) का कार्य शुरू किया गया, ताकि पात्र मतदाताओं की सही जानकारी एकत्र की जा सके।
ड्राफ्ट लिस्ट पहले ही जारी
इस अभियान के तहत 6 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट वोटर लिस्ट) प्रकाशित किया गया था। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को अपने नाम, पता और अन्य विवरण जांचने का अवसर दिया गया। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या चूक पाई जाती है, तो मतदाता दावे या आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
फाइनल वोटर लिस्ट कब आएगी
चुनाव आयोग के अनुसार, सभी दावे और आपत्तियों का निपटारा करने के बाद 10 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) जारी की जाएगी। यह सूची आगामी चुनावों के लिए मान्य होगी।
मतदाताओं से अपील
निर्वाचन आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी योग्य मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर लें और आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित फॉर्म भरकर आवेदन करें।
आवेदन ऑनलाइन पोर्टल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किए जा सकते हैं।
समय सीमा बढ़ने से उन मतदाताओं को विशेष राहत मिली है, जो पहले किसी कारणवश आवेदन नहीं कर पाए थे। चुनाव आयोग का मानना है कि इस कदम से मतदाता सूची अधिक पारदर्शी, सटीक और समावेशी बन सकेगी।