पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में लगातार दो दिनों तक चले हिंसक हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई में अब तक 190 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में आम नागरिक, सुरक्षा बलों के जवान और बड़ी संख्या में हमलावर शामिल हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन हमलों के लिए भारत पर परोक्ष रूप से आरोप लगाए हैं, जबकि भारत ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने क्वेटा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अलगाववादी आतंकियों ने बैंक, जेल, पुलिस थाने और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इन हमलों में कम से कम 31 नागरिकों और 17 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई। मुख्यमंत्री के अनुसार, सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में 145 से अधिक हमलावरों को मार गिराया, जिनमें शुक्रवार को मारे गए 40 से ज्यादा आतंकी भी शामिल हैं।
हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। कई जिलों में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया और संवेदनशील इलाकों में घेराबंदी की गई। मुख्यमंत्री बुगती ने कहा, “हम उन्हें आसानी से नहीं छोड़ेंगे। हमारा खून इतना सस्ता नहीं है। हम उनके ठिकानों तक उनका पीछा करेंगे।”
संचार सेवाएं बाधित
हिंसा के बाद पूरे बलूचिस्तान में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बीते दो दिनों से बंद रहीं। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, सड़क यातायात बाधित है और ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं। प्रांत की राजधानी क्वेटा में धमाकों के बाद बाजार बंद रहे और लोग घरों में ही रहे।
क्वेटा के एक दुकानदार हमदुल्लाह ने एएफपी से कहा, “कोई भी घर से निकलता है तो सुरक्षित लौटने की कोई गारंटी नहीं होती। हर समय डर बना रहता है।”
अलगाववादी संगठन की जिम्मेदारी
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित BLA ने एक बयान में कहा कि उसने सैन्य ठिकानों, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाया। संगठन का दावा है कि उसने गोलीबारी और आत्मघाती हमलों को अंजाम दिया।
भारत पर आरोप और प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी, जो शनिवार रात क्वेटा पहुंचे थे, ने दावा किया कि हमलों को भारत का समर्थन प्राप्त था, हालांकि उन्होंने कोई सबूत पेश नहीं किया। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इसी तरह का बयान दिया।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हम पाकिस्तान द्वारा लगाए गए निराधार आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। यह अपने आंतरिक मुद्दों से ध्यान हटाने की उसकी पुरानी रणनीति है।” बयान में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान को क्षेत्र में अपने लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
बलूचिस्तान की पृष्ठभूमि
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे गरीब प्रांत है। शिक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास जैसे अधिकांश सूचकांकों में यह देश के अन्य हिस्सों से पीछे है। अलगाववादी समूह लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार प्रांत के प्राकृतिक गैस और खनिज संसाधनों का दोहन करती है, लेकिन स्थानीय आबादी को इसका लाभ नहीं मिलता।