संयुक्त राज्य अमेरिका के स्मिथसोनियन संस्थान के अंतर्गत आने वाले नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट ने भारत को दक्षिण भारतीय कला परंपरा से जुड़ी तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियां लौटाने का निर्णय लिया है। संग्रहालय की ओर से गुरुवार को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि यह फैसला विस्तृत प्रॉवेनेंस (उत्पत्ति और स्वामित्व इतिहास) जांच के बाद लिया गया है। लौटाई जाने वाली मूर्तियों में चोल काल की “शिव नटराज” (लगभग 990 ई.), चोल काल की ही “सोमस्कंद” (12वीं शताब्दी) और विजयनगर काल की “संत सुंदरर परवई के साथ” (16वीं शताब्दी) शामिल हैं।
संग्रहालय के अनुसार, ये तीनों मूर्तियां दक्षिण भारत की प्रसिद्ध कांस्य कला परंपरा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं और मूल रूप से मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक जुलूसों के लिए उपयोग की जाती थीं। जांच में यह सामने आया कि ये सभी मूर्तियां भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए देश से बाहर ले जाई गई थीं।
लंबी जांच के बाद लिया गया फैसला
नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट ने अपने दक्षिण एशिया संग्रह की व्यवस्थित समीक्षा शुरू की थी, जिसके तहत स्वामित्व रिकॉर्ड और लेन-देन के इतिहास की जांच की गई। संग्रहालय ने बताया कि वर्ष 2023 में फ्रांस के पांडिचेरी स्थित फ्रेंच इंस्टिट्यूट के फोटो आर्काइव्स के साथ मिलकर किए गए शोध में पुष्टि हुई कि इन मूर्तियों की तस्वीरें 1956 से 1959 के बीच तमिलनाडु के विभिन्न मंदिरों में ली गई थीं।
इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सत्यापित किया कि इन वस्तुओं को भारतीय कानूनों के उल्लंघन में हटाया गया था। इसी आधार पर संग्रहालय ने भारत सरकार को मूर्तियां लौटाने का निर्णय किया।
शिव नटराज रहेगा दीर्घकालिक ऋण पर
हालांकि तीनों मूर्तियां भारत को लौटाई जाएंगी, लेकिन भारतीय सरकार ने “शिव नटराज” प्रतिमा को नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट में दीर्घकालिक ऋण (लॉन्ग-टर्म लोन) पर रखने पर सहमति जताई है। यह प्रतिमा संग्रहालय की प्रदर्शनी The Art of Knowing in South Asia, Southeast Asia, and the Himalayas का हिस्सा बनी रहेगी।
संग्रहालय ने कहा कि इस व्यवस्था से वह इस प्रतिमा का पूरा इतिहास सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत कर सकेगा, जिसमें इसके मंदिर से हटाए जाने और फिर भारत को लौटाए जाने की प्रक्रिया भी शामिल होगी।
संग्रहालय निदेशक का बयान
नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट के निदेशक चेस एफ. रॉबिन्सन ने कहा, “नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट सांस्कृतिक धरोहर के जिम्मेदार संरक्षण और अपने संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने आगे कहा कि मूर्तियों की वापसी संग्रहालय की नैतिक संग्रहालय प्रथाओं पर केंद्रित सोच को दर्शाती है। रॉबिन्सन ने शिव नटराज को दीर्घकालिक रूप से प्रदर्शित करने की अनुमति देने के लिए भारत सरकार का भी आभार व्यक्त किया।
कैसे संग्रहालय तक पहुंचीं मूर्तियां
अतिरिक्त शोध में यह भी सामने आया कि “शिव नटराज” मूर्ति तमिलनाडु के श्री भव औषधेश्वर मंदिर से संबंधित थी और वर्ष 2002 में फर्जी दस्तावेजों के जरिए संग्रहालय को बेची गई थी। वहीं, “सोमस्कंद” और “संत सुंदरर परवई के साथ” मूर्तियां 1987 में एक बड़े दान के हिस्से के रूप में संग्रहालय के संग्रह में शामिल हुई थीं।
संग्रहालय ने बताया कि वह भारत में मूर्तियों की वापसी की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय दूतावास के साथ निकट समन्वय में काम कर रहा है। साथ ही, संग्रहालय ने अपनी प्रॉवेनेंस रिसर्च टीम, क्यूरेटरों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को इस जांच में सहयोग के लिए श्रेय दिया है।