प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक के नवीन संस्करण को संबोधित करते हुए भारत को ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक निवेश और साझेदारी के लिए एक प्रमुख गंतव्य बताया। इस अवसर पर दुनिया के लगभग 125 देशों के प्रतिनिधि, मंत्री, राजनयिक, सीईओ और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख हितधारक उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश अवसरों और भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता मिशन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इंडिया एनर्जी वीक बना वैश्विक मंच
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंडिया एनर्जी वीक कम समय में संवाद और कार्रवाई का एक वैश्विक मंच बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसके कारण ऊर्जा उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि भारत आज पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष पांच वैश्विक निर्यातकों में शामिल है और 150 से अधिक देशों को निर्यात करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मंच भारत और वैश्विक साझेदारों के बीच सहयोग की संभावनाएं तलाशने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
भारत-EU व्यापार समझौते का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुए बड़े समझौते का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के 140 करोड़ नागरिकों और यूरोप के करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर लेकर आया है।
उन्होंने कहा कि यह करार दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का उदाहरण है और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 25 प्रतिशत तथा वैश्विक व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता व्यापार के साथ-साथ लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी सशक्त करता है।
मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस व्यापार समझौते से भारत में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी और सेवा क्षेत्र का भी विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक निवेशकों का भारत पर भरोसा और मजबूत होगा।
उन्होंने टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और फुटवियर जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों को बधाई दी और कहा कि यह समझौता इन क्षेत्रों के लिए सहायक सिद्ध होगा।
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ऊर्जा वैल्यू चेन के हर स्तर पर निवेश के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि भारत ने अपने एक्सप्लोरेशन सेक्टर को अधिक खुला बनाया है और डीप-सी एक्सप्लोरेशन के लिए समुद्र मंथन मिशन पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत इस दशक के अंत तक ऑयल और गैस सेक्टर में निवेश को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का प्रयास कर रहा है और एक्सप्लोरेशन क्षेत्र को 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। अंडमान-निकोबार बेसिन को उन्होंने भारत की अगली हाइड्रोकार्बन संभावना बताया।
रिफाइनिंग, LNG और गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रिफाइनिंग क्षमता लगभग 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है और इसे 300 एमएमटीपीए से अधिक करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि रिफाइनिंग क्षमता के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है।
उन्होंने कहा कि भारत कुल ऊर्जा मांग का 15 प्रतिशत LNG से पूरा करने का लक्ष्य रखता है। LNG ट्रांसपोर्टेशन, शिप बिल्डिंग, टर्मिनल, री-गैसीफिकेशन, पाइपलाइन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश अवसर मौजूद हैं।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता के मिशन पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा ऊर्जा इकोसिस्टम विकसित कर रहा है जो घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी समाधान उपलब्ध करा सके।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने वैश्विक निवेशकों से “मेक इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया, स्केल विद इंडिया और इन्वेस्ट इन इंडिया” का आह्वान किया।