ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के शेयर मंगलवार को 5.5% गिरकर 33.7 रुपये प्रति शेयर पर आ गए, जो पिछले लगभग एक महीने में सबसे निचले स्तर पर हैं। इस गिरावट के पीछे कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) हरिश अभिचंदानी का व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर इस्तीफा देना प्रमुख वजह रहा।
कंपनी ने तत्काल प्रभाव से दीपक रस्तोगी को नया CFO नियुक्त किया है। रस्तोगी इससे पहले रियल एस्टेट डेवलपर पुरवांकरा में ग्रुप फाइनेंस प्रमुख के रूप में कार्यरत थे।
हरिश अभिचंदानी ने नवंबर 2023 में CFO का पद संभाला था और उन्होंने 2024 में ओला इलेक्ट्रिक के ब्लॉकबस्टर IPO को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। हालांकि, इसके बाद कंपनी की बिक्री धीमी पड़ गई, और नवंबर 2025 में ओला इलेक्ट्रिक ने अपने वित्तीय वर्ष 2026 के राजस्व पूर्वानुमान में कटौती की।
ओला इलेक्ट्रिक कभी भारत की इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट में लगभग 50% हिस्सेदारी रखती थी, लेकिन अब उसे बाज़ाज ऑटो और TVS मोटर जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इन कंपनियों ने मजबूत वितरण नेटवर्क के साथ प्रतिस्पर्धी कीमत वाले मॉडल पेश किए हैं, जिससे ओला इलेक्ट्रिक की बढ़त कम हुई है।
दीपक रस्तोगी की नियुक्ति के बारे में कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज में कहा, “दीपक रस्तोगी P&L नेतृत्व, कैपिटल मार्केट, फंड-रेज़िंग, M&A, IPO तैयारी, रणनीति, परिवर्तन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं। उन्होंने हाल के वर्षों में लगभग 1 बिलियन डॉलर के इक्विटी लेन-देन का नेतृत्व किया है, जिसमें IPO और अंतरराष्ट्रीय M&A शामिल हैं। रस्तोगी मार्जिन विस्तार, कार्यशील पूंजी दक्षता, लागत में कमी, ESG-संबंधित बचत और मजबूत वित्तीय अनुशासन में भी उत्कृष्ट हैं।”
शेयर बाजार में लगातार दसवें सत्र की गिरावट के साथ, ओला इलेक्ट्रिक का स्टॉक 2025 में अब तक 57.7% की गिरावट दर्ज कर चुका है।
कंपनी ने हाल ही में यह भी घोषणा की कि उसने अपने ओला शक्ति बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणन और लाइसेंस हासिल कर लिया है। यह सिस्टम 6kW/9.1 kWh 4680 भारत सेल बैटरी पैक से संचालित होता है और यह भारत का पहला घरेलू स्तर पर डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित रेसिडेंशियल BESS समाधान है।
कंपनी ने बताया कि ओला शक्ति उत्पाद ने व्यापक विद्युत और यांत्रिक सुरक्षा परीक्षणों को पास किया है। इन परीक्षणों में शॉर्ट-सर्किट और ओवरलोड सुरक्षा, आग और तापीय खतरे से बचाव, इलेक्ट्रिक शॉक प्रोटेक्शन, पर्यावरणीय तनाव परीक्षण, सोनिक प्रेशर खतरे का मूल्यांकन, यांत्रिक खतरे का मूल्यांकन और अन्य BIS द्वारा निर्धारित मानकों का पालन शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओला इलेक्ट्रिक की हाल की चुनौतियों में CFO का बदलाव और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में गिरावट प्रमुख हैं। दीपक रस्तोगी की वित्तीय विशेषज्ञता कंपनी को न केवल मौजूदा बाजार दबाव से निपटने में मदद करेगी बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बहाल करने में सहायक होगी।
वहीं, घरेलू बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम का BIS प्रमाणन कंपनी के लिए नई तकनीकी सफलता और घरेलू नवाचार में बढ़त का संकेत देता है। यह कदम ओला इलेक्ट्रिक की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में कंपनी को नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके।
विश्लेषकों के अनुसार, ओला इलेक्ट्रिक को अपनी बिक्री रणनीतियों और वितरण नेटवर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, धीमी बिक्री और वित्तीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों के बीच दीपक रस्तोगी का नेतृत्व कंपनी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
CFO के इस्तीफे और नए नियुक्ति के बीच ओला इलेक्ट्रिक की स्टॉक मार्केट की यात्रा अभी भी अनिश्चित है, लेकिन घरेलू बैटरी स्टोरेज तकनीक और वित्तीय अनुशासन पर जोर देने से कंपनी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।