उत्तर भारत इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। बुधवार को गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान गिरकर 0.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे यह शहर उत्तर भारत के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल हो गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह लगातार दूसरे दिन है जब गुरुग्राम में तापमान शून्य के बेहद करीब बना हुआ है और शीतलहर का असर कम होने के कोई संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो पिछले करीब 50 वर्षों में सबसे कम तापमान में से एक है। यह तापमान न केवल एनसीआर बल्कि कई हिमालयी हिल स्टेशनों से भी कम रहा, जिससे लोग हैरान हैं। IMD के ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन के मुताबिक, 0.6 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा 22 जनवरी 1977 के रिकॉर्ड की बराबरी करता है। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो गुरुग्राम में इससे कम तापमान केवल तीन बार दर्ज किया गया है—5 दिसंबर 1966 को माइनस 0.4 डिग्री, 11 जनवरी 1970 को 0 डिग्री और 22 जनवरी 1979 को 0.3 डिग्री सेल्सियस।
कड़ाके की ठंड का असर पूरे एनसीआर और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में साफ तौर पर देखा जा रहा है। दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र में बुधवार को न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि आसपास के कई इलाकों में तापमान शून्य के करीब पहुंच गया। सर्द हवाओं और साफ आसमान की वजह से रात के समय तेज रेडिएशनल कूलिंग हो रही है, जिससे मैदानी इलाकों में तापमान तेजी से गिर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां मैदानी इलाके कड़ाके की ठंड झेल रहे हैं, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत ज्यादा बना हुआ है। उत्तराखंड का मसूरी 7.7 डिग्री सेल्सियस और हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला 8.8 डिग्री सेल्सियस के साथ गुरुग्राम और दिल्ली से ज्यादा गर्म रहे। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह असामान्य स्थिति सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बनी है।
IMD के महानिदेशक एम. मोहापात्रा ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में रात के समय बादल छाए रहने के कारण धरती की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे न्यूनतम तापमान ज्यादा गिरने से बच जाता है। उन्होंने कहा कि इसके उलट मैदानी इलाकों में आसमान साफ है और उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने वाली ठंडी हवाएं लगातार तापमान को नीचे धकेल रही हैं। यही वजह है कि इस बार मैदान पहाड़ों से ज्यादा ठंडे महसूस किए जा रहे हैं।
गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में इस भीषण ठंड के साफ असर दिखाई दे रहे हैं। सुबह के समय खेतों, घास के मैदानों और गाड़ियों के शीशों पर पाला जम गया। कई इलाकों में फसलों पर पाले की मोटी परत देखी गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। सड़कों और फ्लाईओवरों पर भी पाले और कोहरे के कारण फिसलन और कम दृश्यता की स्थिति बनी रही।
स्थानीय लोगों के लिए यह ठंड असहनीय साबित हो रही है। सेक्टर 66 में काम करने वाले 22 वर्षीय साइट इंजीनियर जीवा थवसीराज ने बताया कि उन्होंने जीवन में पहली बार इतनी ठंड महसूस की है। तमिलनाडु से आने वाले जीवा ने कहा कि भारी सेफ्टी शूज पहनने के बावजूद पैरों में सुन्नता आ जाती है और खुले में काम करना बेहद मुश्किल हो गया है।
वहीं, सोहना से रोजाना गुरुग्राम आने-जाने वाली सुनीता देवी ने बताया कि सुबह के समय सफर करना खतरनाक हो गया है। उन्होंने कहा कि बस के शीशों पर पाला जमा हुआ था और खेतों में भी सफेद परत दिख रही थी। ऊंची सड़कों पर कोहरा इतना घना था कि वाहन बेहद धीमी गति से चल रहे थे।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी शीतलहर जारी रहने की संभावना जताई है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और सुबह-शाम अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। खास तौर पर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
गुरुग्राम और एनसीआर इस समय असाधारण ठंड का सामना कर रहे हैं। रिकॉर्ड के करीब पहुंचते तापमान, पाला, कोहरा और सर्द हवाएं जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। मौसम के इस तीखे मिजाज ने यह साफ कर दिया है कि इस साल की सर्दी सामान्य से कहीं ज्यादा कठोर साबित हो रही है।