ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध और कूटनीतिक वार्ता दोनों के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि देश अपने नागरिकों और संस्थानों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के अधिकार का प्रयोग करेगा।
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान की प्राथमिकता हमेशा संवाद और कूटनीतिक समाधान रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिका की धमकियों के बीच देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए दृढ़ है।
विरोध प्रदर्शनों में हुई मौतें और गिरफ्तारियां
अमेरिका आधारित मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, सोमवार तक कम से कम 646 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसमें 505 प्रदर्शनकारी, 113 सुरक्षा और सैन्यकर्मी और 7 आम नागरिक शामिल हैं। संगठन ने 579 और मौतों की जांच करने की जानकारी भी दी है।
विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए और अब तक कुल 10,721 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत में आर्थिक मुद्दों और महंगाई के कारण शुरू हुए प्रदर्शन अब राजनीतिक सुधार, सरकार की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की मांग में बदल गए हैं।
इंटरनेट ब्लैकआउट और सूचना पर रोक
प्रदर्शनों के दौरान ईरान सरकार ने देश में इंटरनेट सेवा को तीन दिन से अधिक समय तक बंद रखा। विशेषज्ञ और मानवाधिकार कार्यकर्ता मानते हैं कि यह कदम सरकार द्वारा हिंसा की वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए उठाया गया है।
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर रोक ने देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन की गंभीरता को समझने में बाधा डाली। इस ब्लैकआउट से सरकार को विरोध की वास्तविक तस्वीर को नियंत्रित करने और अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से पेश करने का अवसर मिला।
अमेरिका और ईरान के बीच संवाद
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माएल बाघाई ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के विशेष मध्यपूर्व दूत स्टीव विटकॉफ़ के साथ अराघची के बीच संवाद का एक चैनल खुला है। उन्होंने बताया कि आवश्यकतानुसार संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है।
हालांकि अमेरिका की ईरान में कोई राजनयिक उपस्थिति नहीं है, लेकिन स्विस दूतावास अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व करता है। यह संवाद चैनल दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक साधन के रूप में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संवाद संकट के समय द्विपक्षीय तनाव को कम करने और संभावित सैन्य टकराव से बचने में मदद कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन, अमेरिकी धमकियां और व्यापार प्रतिबंध संयुक्त रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकते हैं।
ईरान तेल का एक प्रमुख उत्पादक देश होने के कारण इसका वैश्विक बाजार में सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिका की धमकियों के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल मूल्य स्थिरता पर भी दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, ट्रंप द्वारा ईरान व्यापारियों पर लगाया गया नया टैरिफ उन देशों के लिए अतिरिक्त आर्थिक चुनौती बन सकता है जो ईरान के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार करते हैं। यह कदम व्यापारिक रणनीतियों और विदेशी निवेश को प्रभावित कर सकता है।
ईरान के लिए यह संकट क्यों गंभीर है
ईरान में विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट ब्लैकआउट और अमेरिकी धमकियों ने देश के राजनीतिक और सामाजिक वातावरण को अस्थिर कर दिया है। यह संकट केवल आंतरिक सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापार के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति ईरान के लिए 1979 के बाद का सबसे संवेदनशील संकट है। देश के लिए अब यह महत्वपूर्ण है कि हिंसा को कम किया जाए और राजनीतिक संवाद को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखना भी जरूरी है।
ईरान में विरोध प्रदर्शन, अमेरिकी धमकियां और व्यापार प्रतिबंध एक जटिल और संवेदनशील स्थिति पैदा कर रहे हैं। यह केवल देश के आंतरिक राजनीतिक संतुलन पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों पर भी असर डाल सकता है।