महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव: भाजपा का कांग्रेस और AIMIM से अनोखा गठबंधन, देवेंद्र फडणवीस ने बताया पूरा सच

Vin News Network
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महाराष्ट्र में भाजपा ने लोकल चुनाव में बहुमत हासिल करने के लिए कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधन किया, देवेंद्र फडणवीस ने इंटरव्यू में बताया पूरा सच।

महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के परिणामों और गठबंधन समीकरणों ने राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मुंबई समेत कई नगरपालिकाओं में मेयर पद किसके हाथ में जाएगा, यह सवाल अभी अनसुलझा है। इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न्यूज18 इंडिया को विशेष इंटरव्यू में बताया कि भाजपा ने अंबरनाथ और अकोट में कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ क्यों और कैसे गठबंधन किया। उन्होंने बताया कि ये गठबंधन अनायास और अप्रत्याशित थे, और कई मामलों में पार्टी को इसके लिए आगे बढ़ना पड़ा। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि कुछ फैसले गलत साबित हुए, लेकिन स्थिति का प्रबंधन करने के लिए कदम उठाना पड़ा।

अकोट में भाजपा-एआईएमआईएम गठबंधन की कहानी

अकोट नगर परिषद में बीजेपी का बहुमत स्पष्ट नहीं था। अकोट में कुल 17 हजार मतदाता हैं और स्थानीय स्तर पर भाजपा के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, भाजपा ने स्थानीय नेतृत्व की मदद से ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया, जिसमें AIMIM ने भी सहयोग किया।

उन्होंने कहा, “अकोट बहुत छोटी जगह है। हमारे पास वहां स्पष्ट बहुमत नहीं था। स्थानीय स्तर पर एनसीपी पहले से AIMIM के साथ गठबंधन में थी। जैसे ही हमारी एनसीपी के साथ पोस्ट-पोल गठबंधन हुआ, तकनीकी तौर पर AIMIM भी हमारे गठबंधन का हिस्सा बन गया। जैसे ही हमें इसका पता चला, हमने तुरंत इससे बाहर निकलने का निर्णय लिया और अपने MLA को सस्पेंशन नोटिस भेज दिया।”

इस तरह, अकोट में BJP ने नेतृत्व संभाला, जबकि AIMIM ने कुछ समय के लिए सहयोग किया। बाद में यह गठबंधन टूट गया, लेकिन भाजपा ने सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखी।

अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ अप्रत्याशित गठबंधन

अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार गुट) के साथ गठबंधन कर शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से दूर रखा। देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, अंबरनाथ में लोकल स्तर पर भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना नेताओं में मतभेद थे, इसलिए शिंदे गुट के साथ गठबंधन संभव नहीं था।

फडणवीस ने बताया, “हमारे अध्यक्ष का चुनाव हो चुका था, लेकिन स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना नेताओं में दुश्मनी थी। ऐसे में भाजपा ने कांग्रेस के साथ पोस्ट-पोल गठबंधन कर बहुमत हासिल किया। बाद में कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी से निकाल दिया, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए।”

अंबरनाथ नगर परिषद में 59 सीटों में भाजपा को 16, कांग्रेस को 12, एनसीपी (अजित पवार गुट) को 4 और शिंदे गुट की शिवसेना को 23 सीटें मिलीं। भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन से कुल 32 सीटों के साथ बहुमत बन गया। इस प्रकार, अंबरनाथ में भाजपा ने अप्रत्याशित रूप से सत्ता हासिल की और शिंदे गुट की शिवसेना विपक्ष में चली गई।

लोकल स्तर के समीकरणों ने गठबंधन को प्रभावित किया

देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अंबरनाथ और अकोट में गठबंधन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बने। उन्होंने कहा, “लोकल स्तर पर गठबंधन अलग हो सकते हैं। राज्य स्तर पर पार्टी के बड़े फैसले होते हैं, लेकिन नगरपालिकाओं में स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से निर्णय लेना पड़ता है। इसलिए कई बार अप्रत्याशित गठबंधन दिखाई देते हैं।”

उन्होंने यह भी माना कि भाजपा के लिए अंबरनाथ और अकोट में पोस्ट-पोल गठबंधन करना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण था, लेकिन बहुमत हासिल करने के लिए यह जरूरी था।

अकोट विकास मंच और बहुमत की रणनीति

अकोट में कुल 35 सदस्यीय नगर परिषद में भाजपा को केवल 11 सीटें मिलीं। बहुमत के लिए भाजपा ने अपने नेतृत्व में ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया। इस मंच में AIMIM के अलावा शिंदे गुट की शिवसेना, एनसीपी (अजित पवार और शरद पवार गुट), और प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल हुई। इस गठबंधन ने 25 सदस्यीय समर्थन हासिल किया और सत्ता की चाबी भाजपा के हाथ में आ गई।

हालांकि बाद में भाजपा और AIMIM का गठबंधन टूट गया। महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते अकोट विधायक प्रकाश भारसाकले को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।

राजनीतिक विश्लेषण और परिणाम

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव ने राज्य की राजनीति में नए समीकरण पेश किए हैं। भाजपा ने पोस्ट-पोल गठबंधन के माध्यम से अपनी सत्ता बनाए रखी, जबकि कांग्रेस और AIMIM जैसी पार्टियों के साथ असामान्य गठबंधन देखने को मिले। फडणवीस ने यह भी माना कि यह गठबंधन रणनीतिक रूप से सही नहीं था, लेकिन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, लोकल चुनावों में गठबंधन अक्सर अप्रत्याशित होते हैं। राजनीतिक दलों को बहुमत के लिए रणनीतिक गठबंधन करना पड़ता है, खासकर तब जब कोई पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाती। अंबरनाथ और अकोट में भाजपा का यह रणनीतिक कदम उसकी राजनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है।

देवेंद्र फडणवीस के इंटरव्यू ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने स्थानीय परिस्थितियों और बहुमत की जरूरत के हिसाब से अप्रत्याशित गठबंधन किए। अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोट में AIMIM के साथ गठबंधन ने यह साबित किया कि राजनीतिक रणनीति में कभी-कभी पारंपरिक दुश्मनों के साथ भी समझौता करना पड़ सकता है। हालांकि, दोनों ही मामलों में भाजपा ने अपनी सत्ता सुनिश्चित की और विपक्षी दलों को चुनौती दी।

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