मुंबई में लोकल ट्रेन यात्रा अब और सुरक्षित होने वाली है। वेस्टर्न रेलवे (WR) ने अपने 60 किलोमीटर लंबे विरार-चर्चगेट मार्ग पर उन्नत ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ स्थापित करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह कदम मुंबई के रोजाना लाखों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वेस्टर्न रेलवे ने रूट पर टावर निर्माण का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत टावरों का निर्माण हो चुका है और 15 में से 14 लोकेशनों पर मिट्टी की जांच भी पूरी कर ली गई है। 12 स्थानों पर नींव का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य जारी है।
कवच क्या है?
कवच भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे ट्रेन टकराव, अधिक गति और सिग्नल उल्लंघन रोकने के लिए बनाया गया है। इसे औपचारिक रूप से ‘ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP)’ प्रणाली के रूप में अपनाया गया है और जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय ATP प्रणाली घोषित किया गया।
इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य है कि यदि ड्राइवर गलती से सिग्नल मिस कर देता है या ट्रेन अधिक गति से चलती है, तो कावच स्वतः ब्रेक लगा कर दुर्घटनाओं और टकराव को रोक सके।
कवच कैसे काम करता है?
कवच ट्रेन की गति और स्थिति को लगातार मॉनिटर करता है। यदि दो कावच-सुसज्जित ट्रेनें एक-दूसरे के खतरनाक करीब आती हैं या टकराव का जोखिम होता है, तो यह स्वतः ब्रेक लागू कर देती है।
सिग्नल उल्लंघन को रोकने में भी यह मददगार है। यदि कोई ट्रेन रेड सिग्नल (SPAD) पार करने की कोशिश करती है, तो कावच स्वतः ट्रेन को रोक देता है।
इसके अलावा, यह सुरक्षित गति सीमा लागू करता है और ड्राइवर के समय पर गति घटाने में विफल रहने पर स्वतः ब्रेक लगाता है। लोकोमोटिव के केबिन में आने वाले सिग्नल संकेत भी प्रदर्शित किए जाते हैं, जिससे धुंध या कम दृश्यता में भी ड्राइवर को मदद मिलती है।
तकनीकी विवरण
कावच रेडियो कम्युनिकेशन, RFID टैग और ऑनबोर्ड कंप्यूटर के माध्यम से लगातार रियल-टाइम डेटा आदान-प्रदान करता है। यह ट्रेन की स्थिति और गति का आकलन करता है और यदि कोई ट्रेन अधिक तेजी से किसी सेक्शन में प्रवेश कर रही है या दूसरी ट्रेन के करीब है, तो स्वतः हस्तक्षेप करता है।
यह प्रणाली Safety Integrity Level 4 (SIL-4) प्रमाणित है, जो सुरक्षा-गंभीर तकनीकों के लिए सर्वोच्च श्रेणी है। इसका मतलब है कि यह अत्यधिक विश्वसनीय है और इसमें विफलता की संभावना न्यूनतम है।
कुल योजना और प्रगति
ट्रेन कोलिज़न अवॉइडेंस सिस्टम (TCAS) को 17 स्टेशनों पर लगाया जाएगा। अब तक 6 स्टेशनों पर कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही लिडार सर्वे, RFID टैग इंस्टॉलेशन और ऑप्टिकल केबल बिछाने का काम भी जारी है।
वास्तविक परिस्थितियों में सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है। अब तक 24 किलोमीटर के मार्ग पर इंजन ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।
कावच की यह व्यवस्था धीरे-धीरे पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क में लागू की जा रही है। व्यस्त रूट्स जैसे दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा में इसे चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाएगा। आने वाले वर्षों में यह तकनीक लाखों किलोमीटर के मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
कवच का महत्व
मुंबई जैसे बड़े शहरों में लोकल ट्रेन यात्री प्रतिदिन लाखों की संख्या में सफर करते हैं। ऐसे में सुरक्षा सर्वोपरि है। कावच प्रणाली न केवल दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करेगी बल्कि यात्रियों को मानसिक शांति और भरोसा भी देगी। यह तकनीक आधुनिक रेलवे नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
विरार-चर्चगेट रूट पर कावच की पूरी स्थापना और परीक्षण के बाद यात्रियों को उम्मीद है कि ट्रेन यात्रा और अधिक सुरक्षित और तनावमुक्त होगी।