विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिमी देशों द्वारा भारत के ऑपरेशन सिंदूर पर दिए गए ‘मुक्त सलाह’ की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें पहले अपनी ही समस्याओं और हिंसा पर ध्यान देना चाहिए। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि कुछ देशों का रवैया अक्सर स्वार्थपरक होता है। ये देश केवल तब सक्रिय होते हैं जब उन्हें खुद फायदा होता है, फिर भी भारत पर अपनी राय थोपने की कोशिश करते हैं।
जयशंकर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी देशों ने तनाव बढ़ने की चिंता व्यक्त की थी, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि ये वही देश हैं, जिनके अपने क्षेत्र में हिंसा, युद्ध और अस्थिरता व्याप्त है। उन्होंने कहा, “पहले अपनी धरती पर देखें कि वहां कितना हिंसा है, कितनी जोखिम भरी परिस्थितियां हैं और बाकी दुनिया आपके कार्यों को लेकर कितनी चिंता करती है।” उनका कहना था कि अक्सर लोग दूसरों को सलाह देते हैं, लेकिन अपने कार्यों में दोहरे मानक अपनाते हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी जोर दिया कि भारत को अपनी नीतियों पर ध्यान देना चाहिए और बाहरी टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के प्रति सच्चा है और किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएगा।
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में किया गया था। यह भारत की तीनों सेनाओं द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर लक्षित हवाई और जमीन से हमला था। यह कार्रवाई उस आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें पहलगाम में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मार गिराए गए और कई आतंकी संरचनाएं तबाह हुईं।
जयशंकर की टिप्पणी अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के दावों के बीच आई है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थता की। विदेश मंत्री ने इसे खारिज करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच का सीज़फायर पूरी तरह द्विपक्षीय था और किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ी।
जयशंकर ने यह भी कहा कि पश्चिमी देश अक्सर अपने हितों के अनुसार निर्णय लेते हैं और भारत पर बिना मांगे सलाह देते हैं। उन्होंने कहा, “हमें इसे स्वीकार करना होगा और अपनी नीतियों को मजबूती से लागू करना होगा। दूसरों की बातों से विचलित नहीं होना चाहिए।”
लक्समबर्ग में अपनी यात्रा के दौरान, जयशंकर ने यह संदेश भी दिया कि भारत अब अपने क्षेत्रीय और वैश्विक हितों को लेकर स्पष्ट और सशक्त रुख अपनाएगा। यह विदेश नीति का नया दृष्टिकोण आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्पष्ट विदेश नीति से भारत को वैश्विक मंच पर मजबूती मिलेगी। यह न केवल भारत के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि अन्य देशों को यह संदेश भी देगा कि भारत किसी बाहरी दबाव या सलाह पर अपनी नीति नहीं बदलता।
जयशंकर की बातों से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब अपने निर्णय स्वयं लेगा और अपनी नीतियों में स्वतंत्र रहेगा। विदेश नीति में यह दृष्टिकोण देश की सुरक्षा, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सम्मान को बढ़ाने में मदद करेगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी प्राथमिकताओं, सुरक्षा चिंताओं और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप आगे बढ़ेगा, चाहे दुनिया में कोई भी टिप्पणी या सलाह क्यों न दे।