अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार तड़के एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की है और इस ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाया गया है। ट्रंप ने यह दावा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट के जरिए किया। हालांकि, इस बयान की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर की गई और ऑपरेशन से जुड़ी अधिक जानकारी फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में सुबह 11 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की जाएगी। ट्रंप ने लिखा कि यह ऑपरेशन सफल रहा और वेनेजुएला के नेतृत्व को निशाना बनाया गया।
इसके बाद न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को “शानदार ऑपरेशन” बताया। उन्होंने कहा कि इसमें “बेहद सटीक योजना, बेहतरीन सैनिक और अनुभवी लोग शामिल थे।” ट्रंप के मुताबिक, यह अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे सफल अभियानों में से एक था।
ट्रंप का यह बयान उस समय सामने आया जब वेनेजुएला की राजधानी काराकास में शनिवार तड़के जोरदार धमाके सुने गए। AFP और एसोसिएटेड प्रेस (AP) के पत्रकारों के अनुसार, सुबह करीब 2 बजे स्थानीय समय पर कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें गूंजीं और निचली उड़ान भरते सैन्य विमानों को भी देखा गया।
AP के एक रिपोर्टर ने बताया कि उन्होंने कम से कम सात धमाके सुने, जबकि कई रिहायशी इलाकों के ऊपर से विमान गुजरते दिखाई दिए। धमाकों के बाद शहर के कई हिस्सों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और हालात को लेकर दहशत फैल गई।
इसके कुछ घंटों बाद, अमेरिकी मीडिया नेटवर्क Fox News और CBS News ने ट्रंप प्रशासन के अज्ञात अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी कि इन हवाई हमलों के पीछे अमेरिकी सेना का हाथ था। CBS News ने आगे दावा किया कि अमेरिकी स्पेशल फोर्स डेल्टा फोर्स ने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई और राष्ट्रपति मादुरो को हिरासत में लिया गया।
अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह 1989 में पनामा पर अमेरिकी हमले के बाद लैटिन अमेरिका में अमेरिका का सबसे बड़ा सीधा सैन्य हस्तक्षेप होगा। उस समय अमेरिका ने पनामा के पूर्व शासक मैनुअल नोरिएगा को गिरफ्तार किया था।
हालांकि, वेनेजुएला सरकार की ओर से ट्रंप के दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके उलट, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो ने शनिवार सुबह एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि देश किसी भी विदेशी सैन्य मौजूदगी का डटकर विरोध करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे जान-माल के नुकसान की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हताहतों और घायलों की जानकारी जुटा रही है।
अमेरिका लंबे समय से मादुरो सरकार पर नार्को-स्टेट चलाने, चुनावों में धांधली और लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगाता रहा है। वहीं, मादुरो इन आरोपों को खारिज करते आए हैं। उनका कहना है कि अमेरिका की असली मंशा वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा करना है, जो दुनिया में सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक हैं।
निकोलस मादुरो 2013 में ह्यूगो चावेज़ की मृत्यु के बाद सत्ता में आए थे और तब से अमेरिका-वेनेजुएला संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। हालिया घटनाक्रम ने इन तनावों को और गंभीर बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें वॉशिंगटन और काराकास दोनों पर टिकी हैं। ट्रंप द्वारा घोषित प्रेस कॉन्फ्रेंस और वेनेजुएला की आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही यह साफ हो पाएगा कि क्या वाकई अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में इतना बड़ा सैन्य हस्तक्षेप किया है, या यह दावा अभी सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है।