भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (आईएनएलडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने एक विवादास्पद बयान देकर राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में भी श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे युवा नेतृत्व वाले बड़े आंदोलन होने चाहिए, जो वर्तमान केंद्र सरकार को सत्ता से हटा सकें।
एक वीडियो में, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, चौटाला ने कहा, “श्रीलंका में जैसे बांग्लादेश के युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर किया, नेपाल के युवाओं ने सरकार को सत्ता छोड़ने पर विवश किया, उसी तरह की रणनीति भारत में भी अपनानी पड़ेगी ताकि मौजूदा सरकार को सत्ता से बाहर किया जा सके।” उनके इस बयान से विपक्षी नेताओं की लोकतंत्र विरोधी सोच उजागर हुई है, ऐसा सत्ताधारी दल का आरोप है।
इस बयान की पृष्ठभूमि में दक्षिण एशिया के हालिया राजनीतिक उथल-पुथल को देखें तो बात स्पष्ट होती है। 2022 में श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट के बीच युवाओं के नेतृत्व में बड़े प्रदर्शन हुए, जिससे राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ा। 2024 में बांग्लादेश में छात्रों का कोटा सिस्टम विरोधी आंदोलन पूरे देश में फैल गया और प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर देश से भागना पड़ा। इसी तरह 2025 में नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवा प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
चौटाला के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा करार दिया। एक वीडियो संदेश में पूनावाला ने कहा कि विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना में “असंवैधानिक और भारत विरोधी” मानसिकता अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान के खिलाफ हैं और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास कम करते हैं। पूनावाला ने आगे कहा, “राजनीतिक अंक बनाने के लिए वे लोकतंत्र के खिलाफ भी जा सकते हैं, अपने हित को राष्ट्रहित से ऊपर रखते हैं।”
बीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर विपक्षी नेताओं में “भारत विरोधी कथा” फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने चौटाला के बयान का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेता भारत की राजनीतिक व्यवस्था की वैधता पर सवाल उठाने वाली बातें फैला रहे हैं।
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चौटाला के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे विचार लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हैं। बेदी ने चौटाला परिवार की लंबी राजनीतिक विरासत का जिक्र कर आलोचना की कि उनके बयान विचारधारा से मेल नहीं खाते।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय दल केंद्र सरकार की नीतियों पर हमलावर हैं। चौटाला का बयान विपक्ष की निराशा को दर्शाता है या लोकतंत्र की सीमाओं को चुनौती, इस पर बहस छिड़ गई है। बीजेपी इसे अवसर मानकर विपक्ष को असंवैधानिक करार दे रही है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में गरमाया हुआ है और आगे की प्रतिक्रियाएं आने वाली हैं।