पवार परिवार फिर एकजुट: पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनाव एनसीपी और एनसीपी-एसपी साथ लड़ेंगी

Vin News Network
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पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनाव से पहले अजित पवार ने शरद पवार गुट के साथ गठबंधन का ऐलान किया

महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ सामने आया है। आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) गुट पिंपरी-चिंचवड नगर निगम (पीसीएमसी) चुनाव मिलकर लड़ेंगे। इस घोषणा के साथ ही उन्होंने यह संदेश दिया कि पवार परिवार एक बार फिर साथ आ गया है।

अजित पवार ने यह घोषणा रविवार को पिंपरी-चिंचवड में एक चुनावी प्रचार रैली के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए की। उन्होंने बताया कि नगर निगम चुनावों के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देते समय दोनों गुटों के बीच चर्चा हुई, जिसके बाद संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का फैसला लिया गया। पिंपरी-चिंचवड नगर निगम के लिए मतदान 15 जनवरी को होना है।

अपने संबोधन में अजित पवार ने कहा कि जब पिंपरी-चिंचवड के लिए उम्मीदवार तय किए जा रहे थे, तब एनसीपी और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) गुट ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने इसे परिवार के एकजुट होने से जोड़ा और कहा कि इस फैसले के जरिए पवार परिवार एक बार फिर एक मंच पर खड़ा नजर आएगा।

उन्होंने दोनों गुटों के चुनाव चिह्नों का जिक्र करते हुए कहा कि नगर निगम चुनाव के लिए ‘घड़ी’ और ‘तुतारी’ यानी सीटी एक साथ आ गए हैं। अजित पवार के इस बयान पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह गठबंधन महाराष्ट्र के सबसे अहम शहरी राजनीतिक केंद्रों में से एक पिंपरी-चिंचवड में एनसीपी की स्थिति को मजबूत करेगा।

पार्टी में हुए विभाजन के बाद से दोनों गुटों के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों पर भी अजित पवार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में लंबे समय से यह सवाल था कि आगे क्या होगा और दोनों पक्ष किस दिशा में जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई बार बड़े फैसले महाराष्ट्र के विकास को ध्यान में रखकर लेने पड़ते हैं और यह गठबंधन भी व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, न कि पुरानी बातों के आधार पर।

अजित पवार ने यह भी संकेत दिया कि सीट बंटवारे को लेकर बातचीत स्थानीय स्तर पर शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में स्थानीय नेताओं से चर्चा हो गई है और जल्द ही सीट शेयरिंग का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे चुनाव प्रचार पर पूरा ध्यान दें और किसी भी तरह के विवादित बयान देने से बचें, जिससे गठबंधन को नुकसान पहुंच सकता है।

अपने भाषण में अजित पवार ने गठबंधन को विकास-केंद्रित बताते हुए कहा कि नगर निगम स्तर पर एनसीपी का प्रशासनिक रिकॉर्ड मजबूत रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी ने हमेशा विकास के लिए काम किया है और उन ताकतों को सत्ता से बाहर किया जाएगा, जिन्होंने नगर निगम को कर्ज में डुबोने का काम किया। उन्होंने निर्णायक जनादेश के लिए कड़ी मेहनत करने का आह्वान किया।

पिंपरी-चिंचवड के बाद पुणे नगर निगम चुनावों को लेकर भी दोनों एनसीपी गुटों के बीच बातचीत जारी है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि पिंपरी-चिंचवड में घोषित सहयोग आगे चलकर पुणे जैसे अन्य बड़े नगर निगमों तक भी फैल सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर महाराष्ट्र की शहरी राजनीति पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य की 29 नगर निगमों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इनमें पिंपरी-चिंचवड, पुणे और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) शामिल हैं। सभी नगर निगमों के लिए मतदान 15 जनवरी को होगा, जबकि मतगणना 16 जनवरी को की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर तय की गई है।

वहीं दूसरी ओर, मुंबई में एनसीपी ने अलग रणनीति अपनाते हुए बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है। पार्टी ने रविवार को बीएमसी चुनाव के लिए अपने 37 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। इस सूची में पूर्व मंत्री नवाब मलिक के परिवार के तीन सदस्यों को टिकट दिया गया है। नवाब मलिक के भाई कैप्टन मलिक वार्ड 165 से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनकी बहन डॉ. सईदा खान को वार्ड 168 से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं कैप्टन मलिक की बहू बुसरा नदीम मलिक वार्ड 170 से चुनाव मैदान में उतरेंगी।

एनसीपी सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों की दूसरी सूची जल्द जारी की जाएगी। मुंबई में कुल 227 वार्डों में 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। इस तरह एक ओर जहां पिंपरी-चिंचवड में एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं, वहीं मुंबई में पार्टी ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का रास्ता चुना है। यह रणनीति आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति को नई दिशा दे सकती है।

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