संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोमवार को घोषणा की कि H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन वर्कर्स और उनके H-4 आश्रितों के वीज़ा आवेदनों की जांच में अब ऑनलाइन उपस्थिति और सोशल मीडिया प्रोफाइल का भी आकलन किया जाएगा। यह कदम अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा लागू किए गए नए वीज़ा स्क्रिनिंग नियमों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य H-1B प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकना और साथ ही कंपनियों को योग्य विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देना है।
अमेरिकी दूतावास ने भारत में एक पोस्ट में कहा, “यह समीक्षा सभी राष्ट्रीयताओं के सभी H-1B और H-4 वीज़ा आवेदकों पर वैश्विक स्तर पर लागू की जा रही है। हम आवेदकों से आग्रह करते हैं कि वे अपनी आवेदन प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करें और इन वीज़ा श्रेणियों के लिए अतिरिक्त प्रसंस्करण समय को ध्यान में रखें।”
इस नए कदम के बाद कई भारतीय H-1B वीज़ा धारकों को अपने वीज़ा अपॉइंटमेंट रद्द होने और पुनर्निर्धारित होने की सूचना मिली है। दिसंबर में भारत लौटने वाले सैकड़ों H-1B वीज़ा धारक अपनी वर्क परमिट रिन्यूअल के लिए अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में उपस्थित नहीं हो सके। कई मामलों में उन्हें नए अपॉइंटमेंट की तारीख कुछ महीनों बाद दी गई।
ऑनलाइन उपस्थिति समीक्षा क्या है?
अमेरिका के नए नियमों के तहत, वीज़ा आवेदकों की सोशल मीडिया गतिविधियों और ऑनलाइन उपस्थिति की जाँच की जाएगी। इसमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पोस्ट और प्रोफाइल की समीक्षा शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया उन आवेदकों को पहचानने में मदद करेगी जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।
इस नई प्रणाली को लागू करने का मकसद H-1B प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकना है। H-1B वीज़ा अमेरिका में विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को काम करने की अनुमति देता है, जिसमें भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। अमेरिका में H-1B वीज़ा धारकों में 70% से अधिक भारतीय हैं।
पृष्ठभूमि: H-1B प्रोग्राम और ट्रम्प प्रशासन
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके प्रशासन ने H-1B वीज़ा कार्यक्रम पर लगातार कड़ी नज़र रखी है। यह कार्यक्रम अमेरिका के इमिग्रेशन पॉलिसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो देश में विशेषज्ञ और उच्च कौशल वाले कर्मचारियों को लाने में मदद करता था।
हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने इस प्रोग्राम के उपयोग को सीमित करने के लिए कई नीतिगत बदलाव किए। इसके तहत H-1B, F-1 और J-1 वीज़ा श्रेणियों में नए नियम लागू किए गए, जिससे कई वीज़ा धारक अपने देश में फंसे हुए हैं।
अमेरिका के दूतावास और कांसुलेट अब आवेदकों की व्यापक पृष्ठभूमि जांच कर रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि कई लोग अपने वीज़ा रिन्यूअल अपॉइंटमेंट के लिए अमेरिका नहीं जा पा रहे हैं।
भारत में असर
भारत में H-1B वीज़ा धारकों ने सोशल मीडिया समीक्षा की नई नीति के चलते चिंता जताई है। कई लोग अपने काम पर लौटने और अमेरिकी कंपनियों के लिए रोजगार जारी रखने में असमर्थ हो गए हैं।
अमेरिकी दूतावास ने कहा कि सभी H-1B और H-4 वीज़ा आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन आवेदकों को अतिरिक्त समय का अनुमान लगाना चाहिए। इसका मतलब है कि वीज़ा प्रोसेसिंग अब सामान्य समय से लंबा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल H-1B प्रोग्राम की निगरानी बढ़ाता है, बल्कि भारत से अमेरिका आने वाले पेशेवरों के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
इस नीति का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि अमेरिका वीज़ा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी लाना चाहता है। H-1B और H-4 वीज़ा धारक, विशेषकर भारतीय पेशेवर, अब अपने ऑनलाइन व्यवहार और प्रोफाइल के लिए अधिक सतर्क होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति उन कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को भर्ती करती हैं। उन्हें वीज़ा प्रोसेसिंग में अतिरिक्त समय और देरी को ध्यान में रखना होगा
अमेरिका की यह नई ऑनलाइन उपस्थिति समीक्षा नीति H-1B और H-4 वीज़ा धारकों के लिए एक बड़ा बदलाव है। भारतीय पेशेवरों को अब अधिक सावधानी और समय के साथ आवेदन प्रक्रिया में हिस्सा लेना होगा।
यह कदम H-1B प्रोग्राम की सुरक्षा बढ़ाने और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भविष्य में, वीज़ा आवेदकों के लिए ऑनलाइन व्यवहार और प्रोफाइल की निगरानी अब सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएगी।