भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को एक और बड़ा झटका लगा है। बेल्जियम के सर्वोच्च न्यायालय कोर्ट ऑफ केसैशन ने मंगलवार को उसकी अपील खारिज कर दी। यह वही अपील थी जिसमें उसने भारत प्रत्यर्पण का विरोध किया था। इस फैसले के बाद उसके बचने के कानूनी रास्ते और कम हो गए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने अदालत के निर्णय की जानकारी दी और बताया कि चोकसी की दलीलों में कोई मजबूत आधार नहीं मिला।
चोकसी ने अदालत में दावा किया था कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी और उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उसने कहा कि उसके खिलाफ राजनीति से प्रेरित कार्रवाई की जा रही है। लेकिन बेल्जियम की अदालत ने माना कि उसकी बातें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। कोर्ट ऑफ केसैशन देश की सर्वोच्च अदालत है। यह केवल यह देखती है कि निचली अदालतों ने कानून का पालन किया या नहीं। इस मामले में अदालत ने पाया कि निचली अदालतों ने कानून के अनुसार ही फैसला दिया है। इसलिए चोकसी की अपील को खारिज कर दिया गया।
भारत सरकार कई सालों से चोकसी को भारत लाने की कोशिश कर रही है। चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है, जो देश के सबसे बड़े बैंक घोटालों में से एक है। भारत चाहता है कि चोकसी वापस आए और अदालत में जवाबदेही तय हो। अब बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत का फैसला भारत के लिए बड़ा कदम है। इससे भारत की कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल गई है। यह संदेश भी गया है कि चोकसी लगातार कानूनी दांव-पेंच चला रहा था, लेकिन अब उसके तर्क कमजोर पड़ते जा रहे हैं।
चोकसी 2018 में देश से भाग गया था। वह एंटीगुआ एंड बारबुडा में जाकर बस गया और वहां की नागरिकता ले ली। उसने वहीं से भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए कई कानूनी दांव चले। 2021 में वह संदिग्ध परिस्थितियों में डोमिनिका पहुंच गया था। चोकसी का कहना था कि उसे जबरन वहां ले जाया गया, लेकिन डोमिनिका की अदालतों ने उसे भारत भेजने से इनकार कर दिया। बाद में वह वापस एंटीगुआ लौट गया। इन सब कोशिशों के बावजूद, अब बेल्जियम की सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साफ है कि उसकी पूरी रणनीति कमजोर होती जा रही है। अदालतों में उसके तर्क पहले जैसी ताकत नहीं रखते।
बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत में अपील खारिज होना चोकसी के लिए बड़ा झटका है। सर्वोच्च अदालत में केस जाने का मतलब होता है कि यह अंतिम कानूनी मौका होता है। अब उसके पास आगे लड़ने के लिए बहुत सीमित अवसर ही बचे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यही से पता चलता है कि चोकसी के दावे अंतरराष्ट्रीय अदालतों में टिक नहीं पा रहे हैं। उसके आरोपों को अदालतें पर्याप्त सबूतों के बिना मानने को तैयार नहीं हैं।
यह फैसला चोकसी के भविष्य को लेकर भी बड़ा असर डाल सकता है। अब विदेशों में भी उसके लिए सुरक्षित रहना मुश्किल होता जा रहा है। भारत सरकार इस फैसले के बाद और सक्रिय हो सकती है। सरकार बेल्जियम और एंटीगुआ की सरकारों से बातचीत कर सकती है ताकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण एक लंबी प्रक्रिया होती है। इसमें देशों के कानूनी और राजनीतिक संबंध भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट स्तर पर चोकसी की अपील खारिज होना भारत के लिए मजबूत आधार बनाता है।
अब भारत यह दलील दे सकता है कि अंतरराष्ट्रीय अदालतें भी चोकसी के आरोपों को मान्यता नहीं दे रहीं। इससे उसकी वापसी की संभावना बढ़ती है। यकीनन यह कहना मुश्किल है कि चोकसी कब भारत वापस आएगा। लेकिन यह साफ दिख रहा है कि उसके कानूनी बचाव कमजोर हो रहे हैं। सर्वोच्च अदालत का यह फैसला उसके लिए बहुत बड़ा झटका है। अब उसके पास पहले जैसा सुरक्षा कवच नहीं बचा। भारत सरकार भी इस मौके का फायदा उठाकर प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा सकती है। अगर आने वाले महीनों में अन्य अदालतों में भी ऐसे ही फैसले आते हैं, तो चोकसी की भारत वापसी अब दूर की बात नहीं रह जाएगी।