पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों द्वारा भारी निकासी देखी गई। 7 दिनों में विदेशी निवेशकों ने लगभग ₹11,820 करोड़ का निवेश वापस ले लिया, जिससे बाजार पर दबाव पड़ा और रुपया भी कमजोर हुआ। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 83.50 के स्तर के आसपास आ गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया। विदेशी निवेशकों की यह तेजी से निकासी मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूती से जुड़ी हुई बताई जा रही है।
हालांकि, इस बीच घरेलू निवेशकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने बाजार में लगभग ₹19,783 करोड़ की खरीदारी की, जिससे बाजार में संतुलन बना और गिरावट की गति धीमी हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू निवेशकों की यह सक्रियता भारतीय शेयर बाजार की स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है। यह साफ संकेत है कि घरेलू निवेशक विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद बाजार में अवसर देख रहे हैं और लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में सुधार का मुख्य कारण घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी रही। मिड और स्मॉल कैप शेयरों में घरेलू निवेशक अधिक रुचि दिखा रहे हैं, जिससे बाजार में तरलता बनी रहती है। इसके साथ ही बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी घरेलू निवेशकों की खरीद से बाजार की धारणा मजबूत बनी हुई है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये की कमजोरी और विदेशी निकासी के कारण बाजार में अस्थिरता बनी रहती है। लेकिन घरेलू निवेशकों की खरीद इसे संतुलित करने में मदद कर रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय निवेशक विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं हैं और वे बाजार की दिशा को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
विशेष रूप से IT, बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में घरेलू निवेशकों की सक्रियता देखी गई। इन सेक्टरों में निवेशकों ने मौजूदा गिरावट का लाभ उठाकर शेयरों की खरीदारी की। वहीं, मेटल और ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेशकों की निकासी से दबाव बना रहा।
यह स्थिति बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत भी है। विदेशी निवेशकों की निकासी अस्थायी हो सकती है, लेकिन घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी बाजार को स्थिरता और लंबी अवधि का भरोसा देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में घरेलू निवेशकों की सक्रियता और सरकारी नीतियों का असर बाजार के रुझान को तय करेगा।
7 दिनों में ₹11,820 करोड़ की विदेशी निकासी और ₹19,783 करोड़ की घरेलू खरीद के बीच बाजार ने संतुलन बनाए रखा। यह भारतीय शेयर बाजार की मजबूती और घरेलू निवेशकों की भूमिका को दर्शाता है, जो विदेशी अस्थिरता के बावजूद बाजार में स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।