गोवा के लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्र अर्पोरा में शुक्रवार रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब बर्च बाय रोमियो लेन नामक प्रतिष्ठान में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते भयावह रूप ले लिया। इस दुर्घटना में 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें चार विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। इसके अलावा 50 से अधिक लोग घायल हो गए जिन्हें नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में अधिकांश वहीं काम करने वाले कर्मचारी थे, जो घटना के समय अंदर मौजूद थे।
आग कैसे भड़की? प्रारंभिक जांच में सिलेंडर विस्फोट की आशंका
जांच टीमों की शुरुआती रिपोर्टों में यह सामने आया है कि आग की शुरुआत संभवतः गैस सिलेंडर के फटने से हुई। विस्फोट इतना तेज था कि कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर में धुआँ फैल गया। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। फायर विभाग के अनुसार, तीन लोगों की मौत सीधे गंभीर जलने से हुई, जबकि बाकी लोगों ने घने धुएँ से दम घुटने के कारण दम तोड़ा। घटना स्थल एक बंद ढांचा था, जिससे धुआँ बाहर निकलने का रास्ता नहीं पा सका और अंदर फँसे लोगों के लिए स्थिति और विकराल हो गई।
घायल कर्मचारियों और पर्यटकों की हालत गंभीर
अस्पताल प्रशासनों ने बताया कि कई घायलों की हालत नाज़ुक है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं। धुएँ के कारण जिन्हें साँस लेने में तकलीफ़ हुई, उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है, जबकि गंभीर जले हुए घायलों को उन्नत चिकित्सा के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज रेफ़र किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विस्फोट की आवाज़ इतनी तेज थी कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग तुरंत बाहर निकल आए। आग को काबू करने में लगभग दो घंटे का समय लगा।
कर्मचारियों पर सबसे बड़ा असर, शिफ्ट के दौरान हुई त्रासदी
अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस घटना में जान गंवाने वालों में अधिकांश कर्मचारी थे, जो डिनर शिफ्ट के दौरान अंदर काम कर रहे थे। रात के समय रेस्तरां में भीड़ होने के कारण कर्मचारी रसोई और मुख्य हॉल क्षेत्र में व्यस्त थे, जिससे वे आग लगने पर बाहर निकल नहीं पाए। रेस्तरां परिसर के संकरे गलियारे और सीमित आपात निकास को भी बचाव कार्य में आने वाली बड़ी बाधाओं में गिना जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का बेहतर पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी जनहानि रोकी जा सकती थी।
प्रशासन ने कराया रेस्क्यू ऑपरेशन, मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश
घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन दल, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुँचीं। रेस्क्यू टीमों ने काँच तोड़कर कई लोगों को बाहर निकाला। गोवा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और घटना की मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। गोवा सरकार ने मृतकों के परिवारों को सहायता प्रदान करने और घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने हादसे को “गंभीर त्रासदी” बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों में नाराज़गी, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि पर्यटन स्थलों पर बने कई प्रतिष्ठान सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं। गैस सिलेंडरों का अनुचित उपयोग, उचित वेंटिलेशन का अभाव और फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता पर पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। इस घटना ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
पोस्टमॉर्टम और पहचान प्रक्रिया जारी
मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और पहचान की प्रक्रिया चल रही है। चार पर्यटकों की राष्ट्रीयता के बारे में अभी आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। पुलिस ने बताया कि परिजनों को सूचित किया जा रहा है और आगे की कार्यवाही प्रोटोकॉल के अनुसार की जाएगी।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सिलेंडर क्यों फटा और क्या परिसर में आवश्यक सुरक्षा उपाय मौजूद थे। आग लगने के समय स्थल पर मौजूद कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।