डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट: 90.25 के नए निचले स्तर पर पहुँचा, FII निकासी से बढ़ा दबाव

Vin News Network
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रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 90.25 पर फिसला। FII निकासी और बैंकों द्वारा डॉलर खरीदने से दबाव और बढ़ा।

भारतीय रुपया बुधवार, 3 दिसंबर 2025 को विदेशी मुद्रा बाजार में भारी दबाव में रहा और अंतर-दिवसीय कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 90.25 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया। यह स्तर पिछले सत्र के समापन दर की तुलना में 29 पैसे कमजोर है। मुद्रा में आई इस तेज गिरावट के पीछे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, जोखिम से बचने की वैश्विक प्रवृत्ति और घरेलू बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर डॉलर की खरीदारी प्रमुख कारण रहे।

मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मजबूती और डॉलर इंडेक्स में तेजी ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर व्यापक दबाव डाला है। रुपया भी इससे अछूता नहीं रहा और पूरे सत्र में कमजोर रुख प्रदर्शित करता रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि FIIs द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार में की जा रही आक्रामक निकासी ने स्थानीय मुद्रा पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है, क्योंकि निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।

मुद्रा कारोबार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कई घरेलू बैंकों ने आयातकों की मांग को पूरा करने के लिए डॉलर की जमकर खरीदारी की, जिससे रुपये की गिरावट और तेज हो गई। यह मांग मुख्य रूप से तेल विपणन कंपनियों और अन्य बड़े आयातकों की ओर से आई, जिन्हें महीने के अंत में भुगतान निपटान के लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है।

हालांकि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया गया है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने दिन के शुरुआती हिस्से में कोई बड़े पैमाने पर डॉलर बेचकर बाजार को स्थिर करने का संकेत नहीं दिया। विश्लेषकों का कहना है कि RBI आवश्यकता पड़ने पर अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए स्पॉट और फॉरवर्ड बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।

वैश्विक बाजार भी इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका में संभावित ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिज़र्व के संकेतों, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊँची कीमतों ने उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। इन अंतरराष्ट्रीय कारकों का प्रभाव भारतीय रुपये पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया है।

ट्रेडरों का कहना है कि निकट भविष्य में रुपये पर दबाव बना रह सकता है, खासकर तब तक जब तक FII प्रवाह स्थिर नहीं होता और वैश्विक संकेतों में सुधार नहीं आता। यदि डॉलर की मांग यूँ ही बनी रही, तो आने वाले सत्रों में रुपये के लिए और चुनौतियाँ तैयार हो सकती हैं।

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