भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में 5.543 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और यह 692.576 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह आंकड़ा देश की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन व आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, रिज़र्व बैंक के विवरण के अनुसार, 21 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्तियों (Foreign Currency Assets) में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा संपत्तियाँ कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं। इस अवधि में यह घटकर 560.6 अरब डॉलर रह गई, जो 1.69 अरब डॉलर की कमी को दर्शाता है।
विदेशी मुद्रा संपत्तियों में कमी और कुल भंडार में वृद्धि के इस विरोधाभासी आंकड़े का कारण अन्य घटकों में बदलाव हो सकता है। रिज़र्व बैंक के आंकड़ों में अन्य घटक जैसे सांविधिक स्वर्ण भंडार (Gold Reserves), एसडीआर (SDR – Special Drawing Rights) और IMF में आरक्षित हिस्सेदारी में वृद्धि की वजह से कुल विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ स्थिर स्थिति को दर्शाता है। विदेशी मुद्रा भंडार में यह वृद्धि भारत की विदेशी देनदारी का प्रबंधन, मुद्रा विनिमय दरों में स्थिरता, और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास के लिए सकारात्मक संकेत देती है।
संक्षेप में, पिछले सप्ताह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कुल मिलाकर बढ़ोतरी हुई है, जबकि विदेशी मुद्रा संपत्तियों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की वित्तीय मजबूती और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहभागिता की क्षमता को दर्शाता है।