खरमास के समाप्त होते ही लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) के अध्यक्ष चिराग पासवान बिहार में सक्रिय राजनीतिक यात्रा पर निकलने जा रहे हैं। इस दौरे के दौरान उनका लक्ष्य केवल चुनावी जनसंपर्क तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वह बिहार के विभिन्न जिलों में अपनी पार्टी की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ समाज के पिछड़े और दलित वर्ग के लिए नई पहल भी करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चिराग पासवान इस यात्रा को दलित और पिछड़े समाज के लिए एक सशक्त संदेश के रूप में देख रहे हैं। उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण भारती भी इस अभियान में प्रमुख भूमिका निभाने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, अरुण भारती जल्द ही ‘नई दलित सेना’ के गठन की घोषणा करेंगे, जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सशक्त बनाना होगा।
इस यात्रा का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टियों द्वारा जनसमूह से सीधे संवाद और वोट बैंक बनाने की रणनीति जोर पकड़ रही है। चिराग पासवान का यह दौरा विशेष रूप से उन जिलों पर केंद्रित होगा, जहां दलित और पिछड़े वर्ग का मतदान प्रतिशत अधिक है।
अरुण भारती ने अपनी योजनाओं का संकेत देते हुए कहा कि नई दलित सेना का निर्माण केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक न्याय, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना है कि दलित और पिछड़े वर्ग को राजनीतिक चेतना और संगठनात्मक शक्ति देने की आवश्यकता है ताकि वे समाज में अपनी आवाज बुलंद कर सकें।
विशेषज्ञ मानते हैं कि चिराग पासवान और अरुण भारती की यह रणनीति LJP के राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के साथ-साथ बिहार में दलित और पिछड़े वोट बैंक को सक्रिय करने का प्रयास है। पार्टी का यह नया अभियान न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि समाजिक दृष्टि से भी एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में रोड शो, जनसभा और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही पार्टी अपने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने पर भी ध्यान देगी। आगामी विधानसभा चुनावों में यह यात्रा LJP के लिए वोट बैंक बनाने और जनता के बीच अपनी उपस्थिति जताने का एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है।
खरमास के बाद बिहार की राजनीति में चिराग पासवान और अरुण भारती की यह सक्रियता राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। देखा जाए तो यह यात्रा केवल चुनावी ही नही बल्कि दलित और पिछड़े समाज को सशक्त बनाने के एक बड़े प्रयास के रूप में भी देखने को मिलेगी।