प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार19 नवंबर, को कोयंबटूर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत प्राकृतिक और जैविक खेती के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहल पर काम कर रही है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो और कृषि अधिक सतत एवं पर्यावरण के अनुकूल बन सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कृषि की एक विधि नहीं है बल्कि यह किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रयास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में प्राकृतिक खेती को अपनाने और बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीक और किसानों की भागीदारी आवश्यक है। इस दिशा में सरकार ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन जैसी योजनाओं की शुरुआत की है जिसके तहत किसानों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने लगभग 50 वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों से भी संवाद किया जो प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित किया कि वे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम से कम उपयोग करें और प्राकृतिक विधियों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने की कोशिश करें। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि, प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के दौरान किसानों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत लगभग 18,000 करोड़ रुपये 9 करोड़ किसानों के खातों में जारी किए। इसके अलावा 10 सफल जैविक किसानों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भारत का उद्देश्य केवल घरेलू बाजार में ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना नहीं है बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक पहचान दिलाना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार किसानों की मेहनत और प्राकृतिक खेती के महत्व को ध्यान में रखते हुए और अधिक योजनाएं और पहल लेकर आएगी।
प्रधानमंत्री के इस भाषण से यह स्पष्ट हुआ कि भारत प्राकृतिक और जैविक खेती के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है और इसके लिए सभी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाएगा। उनका यह संदेश किसानों, वैज्ञानिकों और जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।