फुटबॉल की दुनिया में क्यूरासाओ ने इतिहास रच दिया है। यह छोटा सा देश जिसकी आबादी केवल लगभग 1.56 लाख है अब फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने वाला सबसे छोटा देश बन गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड आइसलैंड के नाम था, जिसने 2018 में रूस में विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था। उस समय आइसलैंड की आबादी लगभग 3.5 लाख थी, जो क्यूरासाओ की आबादी से दोगुनी से भी अधिक थी। क्यूरासाओ ने यह इतिहास जमैका के खिलाफ खेले गए 0-0 ड्रॉ मैच के जरिए पूरा किया। यह ड्रॉ उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि इसी से उन्हें क्वालीफिकेशन की पुष्टि मिली।
बात दें कि।, क्यूरासाओ ने अपनी क्वालीफाइंग यात्रा में शानदार प्रदर्शन किया। 6 मैचों में 12 अंक हासिल करना कोई आसान काम नहीं है और इस दौरान टीम अजेय रही। टीम के कोच, डिक एडवोकेट, पारिवारिक कारणों से मौजूद नहीं थे लेकिन टीम ने उनकी अनुपस्थिति में भी शानदार खेल दिखाया और इतिहास रचा। क्यूरासाओ की सफलता इस बात का उदाहरण है कि छोटे देश भी बड़े टूर्नामेंट में अपनी जगह बना सकते हैं।
फुटबॉल केवल बड़े देशों या बड़ी आबादी वाले देशों का खेल नहीं है। इसमें मेहनत, टीमवर्क, रणनीति और आत्मविश्वास सबसे ज्यादा मायने रखते हैं क्यूरासाओ के खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि अगर जुनून और मेहनत हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। इस उपलब्धि के साथ ही, CONCACAF क्षेत्र से पानामा और हैती ने भी 2026 के विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया। पानामा ने एल साल्वाडोर को 3-0 से हराकर क्वालीफिकेशन हासिल किया जबकि हैती ने निकारागुआ को 2-0 से मात देकर अपनी जगह बनाई। यह दर्शाता है कि कैरिबियाई देशों की फुटबॉल में बढ़ती ताकत और प्रतिस्पर्धा अब साफ नजर आने लगी है। क्यूरासाओ का क्वालीफिकेशन केवल खेल की जीत नहीं है बल्कि यह विश्वास और साहस की जीत भी है।
फीफा विश्व कप 2026 का संस्करण 48 टीमों के साथ होगा और इस विस्तार से छोटे देशों को भी यह मौका मिला कि वे अपनी प्रतिभा और खेल कौशल दुनिया के सामने पेश कर सकें। क्यूरासाओ के खिलाड़ी अब विश्व कप के मंच पर खेलेंगे और अपने देश का नाम रोशन करेंगे। यह उपलब्धि उनके देशवासियों के लिए गर्व और उत्साह का कारण है और फुटबॉल प्रेमियों को प्रेरणा देती है। कुल मिलाकर, क्यूरासाओ का विश्व कप क्वालीफिकेशन एक प्रेरणादायक कहानी है। यह हमें यह सिखाता है कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए बड़े होने की आवश्यकता नहीं है। मेहनत, साहस और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और आने वाले विश्व कप में अपनी प्रतिभा दिखाने का वादा किया है। यह उपलब्धि हमेशा याद रखी जाएगी और छोटे देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।