बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में राजनीतिक और पारिवारिक विवाद सामने आया है। लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने अचानक राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा की और परिवार से अपने व्यक्तिगत संबंधों को भी तोड़ने की बात कही। इस घटना ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अत्यंत दुखद है और बिहार की जनता ऐसे अपमान को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजद नेता तेजस्वी यादव ने पहले अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव को घर से बाहर निकाला और इसके बाद रोहिणी आचार्य को राबड़ी आवास से बाहर किया। मांझी ने कहा कि यह एक शर्मनाक घटना है, विशेषकर उस बेटी के साथ जिसने अपनी किडनी भी दान की थी।
रोहिणी आचार्य ने स्वयं भी इस घटना का दर्द बयान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें परिवार के सदस्यों द्वारा गालियां दी गईं और शारीरिक तौर पर भी धमकाया गया। उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबी सहयोगियों पर व्यक्तिगत आरोप लगाते हुए बताया कि चुनाव में राजद की हार के बाद उनसे अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें अपमानित किया गया।
रोहिणी ने आगे कहा कि उन्होंने अपने परिवार और बच्चों के बारे में सोचते हुए किडनी दान किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा। 16 नवंबर को रोहिणी और उनकी बहनें चंदा, रागिणी यादव समेत अन्य बहनों ने राबड़ी आवास छोड़ दिया और पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से अपनी आपबीती साझा की।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजद के परिवारिक विवादों को उजागर किया है, बल्कि बिहार की राजनीति में भी नई बहस को जन्म दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस विवाद से राजद के अंदरूनी समीकरण और परिवारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है, जबकि जनता की नजरें इस मामले पर बनी हुई हैं।